पश्चिमी यूपी की मिट्टी से गायब हो रहा नाइट्रोजन और जीवांश कार्बन! भूमि परीक्षण रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला खुलासा
मेरठ : जिस तरह से मनुष्य के शरीर में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की कमी पाई जाती है. इसी तरह का सिलसिला अब खेती की जमीनों में भी देखने को मिल रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़, नोएडा, गाजियाबाद, बागपत सहित अन्य जनपदों की अगर बात की जाए यहां पर मिट्टी में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों में काफी कमी पाई जा रही है. जिसका सीधा असर किसानों के साथ-साथ आम जनता के जीवन पर भी पड़ रहा है. इन्हीं बातों को देखते हुए लोकल 18 की टीम द्वारा क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला मेरठ सहायक निदेशक अरुण कुमार खास बातचीत की.
सहायक निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के दिशा निर्देश अनुसार गांव में किसानों को जागरुक करते हुए मिट्टी की जांच कराई जा रही है. क्योंकि मेरठ, हापुड़, नोएडा, गाजियाबाद, बागपत सहित अन्य क्षेत्रों में से जिस तरह से खेतों के मिट्टी के नमूने आ रहे हैं. वह किसानों की टेंशन बढ़ा सकते हैं. क्योंकि उनमें पोषक तत्वों की भारी कमी पाई जा रही है. जिसका असर कृषि भूमि की उर्वरक क्षमता पर पड़ता है. जिस कारण किसान को अधिक लागत लगानी पड़ती है. ऐसे में अगर सभी किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराएं तो उनकी लागत कम लगेगी और वह अधिक मुनाफे के साथ उन्नत किसान की तरफ कदम बढ़ा सकेंगे.
घट रहा नाइट्रोजन और जीवांश कार्बन
अरुण कुमार ने बताया कि मेरठ मंडल के विभिन्न जिलों से लिए गए मिट्टी के सैंपल में पोषक तत्वों का असंतुलन साफ दिखाई दे रहा है. मेरठ में नाइट्रोजन का स्तर काफी कम पाया गया है, फास्फेट मीडियम है, जबकि पोटाश निर्धारित सीमा से अधिक है. जीवांश कार्बन भी जरूरत से नीचे दर्ज किया गया है. हापुड़ में भी नाइट्रोजन, फास्फेट और जीवांश कार्बन की कमी पाई गई है, जबकि पोटाश मीडियम स्तर पर है. बागपत में पोटाश आवश्यकता से अधिक है, फास्फेट मीडियम है. गाजियाबाद की मिट्टी में नाइट्रोजन और जीवांश कार्बन का स्तर काफी नीचे है, फास्फेट मीडियम और पोटाश उच्च स्तर पर दर्ज किया गया है. गौतम बुद्ध नगर में नाइट्रोजन, फास्फेट और जीवांश कार्बन निम्न स्तर पर मिले हैं, जबकि पोटाश ज्यादा है. इसी तरह बुलंदशहर में भी नाइट्रोजन व जीवांश कार्बन कम और फास्फेट मीडियम तथा पोटाश उच्च स्तर पर पाया गया. उन्होंने बताया कि यदि किसान अपनी ज़मीन की जांच कराकर कमी वाले पोषक तत्वों को संतुलित मात्रा में डालें, तो पैदावार बेहतर मिल सकती है.
12 पैरामीटर पर होती है जांच
सहायक निदेशक ने बताया कि मिट्टी की जांच कुल 12 पैरामीटर पर की जाती है. इनमें विद्युत चालकता, पोटाश, फास्फोरस, नाइट्रोजन, कार्बनिक कार्बन, सल्फर, जिंक, आयरन, मैंगनीज, कॉपर और बोरॉन शामिल है. इसके लिए किसानों से मात्र 102 रुपये शुल्क लिया जाता है.