रात में कब्रिस्तान जाने से क्यों लगता है डर? क्यों आती है अजीबो-गरीब आवाजें, जानते क्या हैं पूरी हकीकत
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Graveyard: कब्रिस्तान को लेकर लोगों के मन में डर और रहस्य बना हुआ है. रात में वहां आने वाली आवाज़ें केवल वातावरण की प्राकृतिक ध्वनियां हैं. चीफ मुफ़्ती मौलाना इफराहीम हुसैन ने बताया कि रात में कब्रिस्तान जाना पूरी तरह जायज है, डर केवल वहम और अफवाहों का नतीजा है. वहां जाते समय पाक-सफाई और इस्लामी शिष्टाचार का पालन करना जरूरी है.
अलीगढ़: कब्रिस्तान को लेकर लोगों के मन में हमेशा से डर, रहस्य और जिज्ञासा (जानने की उत्सुकता) माहौल रहा है. खासकर रात में वहां जाने को लेकर तरह-तरह की अफवाहें चारों तरफ फैल जाती हैं. कोई कहता है कि वहां रात में अजीब आवाजें आती हैं, तो कोई मान लेता है कि रात में कब्रिस्तान में जाना खतरनाक है. लेकिन क्या सच में कब्रिस्तान में कोई रहस्यमय घटनाएं होती हैं? क्या यह सिर्फ़ वहम है या इसकी कोई धार्मिक वजह भी है?
हमने इस रहस्य की तह तक जाने की कोशिश की और उत्तर प्रदेश के चीफ मुफ़्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन से रात में कब्रिस्तान जाने के असली इस्लामी उसूल और डर की हकीकत पूछी.
रात का सन्नाटा और डर का माहौल
मौलाना इफराहीम हुसैन बताते हैं कि रात के समय कब्रिस्तान को लेकर आम लोगों के मन में कई तरह की गलत धारणाएं और भय मौजूद हैं. जबकि, इस्लाम में कब्रिस्तान जाने की कोई मनाही नहीं है. कब्रिस्तान दिन में भी जाया जा सकता है और रात में भी. लोग अक्सर यह सोच लेते हैं कि रात में वहां जाना खतरनाक है या वहां अजीबो-गरीब घटनाएं होती हैं, लेकिन यह केवल वहम और माहौल का असर होता है.
मौलाना ने कहा, ‘रात के समय अंधेरा, सन्नाटा और हल्की रोशनी की कमी के कारण स्वाभाविक रूप से डर पैदा होता है. अगर पेड़-पौधों की पत्तियां हिलें, या बिल्ली-कुत्ता कहीं आहट करे, तो मन तुरंत इसे डरावनी आवाज समझ लेता है. यही कारण है कि लोग अक्सर मान लेते हैं कि वहां कोई असामान्य घटना हो रही है, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं होता.
मुर्दे नहीं बोलते, डर सिर्फ़ दिमाग़ का खेल
मौलाना का कहना है कि इस्लाम में ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है कि मुर्दे बोलते हैं, डराते हैं या किसी प्रकार की रहस्यमय घटनाएं करते हैं. कब्रिस्तान से आने वाली आवाज़ें सिर्फ़ प्राकृतिक ध्वनियां होती हैं, जिन्हें डर की वजह से लोग कुछ और समझ लेते हैं. रात में कब्रिस्तान में बुरी या रहस्यमय घटनाएं होने की धारणा पूरी तरह गलत और अफवाहों पर आधारित है. उन्होंने जोर देकर कहा रात में कब्रिस्तान जाना पूरी तरह जायज़ है.
असली डर और वहम का फर्क
उन्होंने बताया कि कब्रिस्तान जाने के कुछ अदब (शिष्टाचार) जरूर हैं- जैसे पाक-साफ रहना, बेहतर है वज़ू करके जाना, और कब्रिस्तान पहुंचकर सलाम करना. वहां से जुड़ी डरावनी बातें महज वहम और अफवाहें हैं. रात के समय कब्रिस्तान का सन्नाटा और हवा में हल्की सरसराहट-इन सबका दिमाग पर psychological असर पड़ता है. लोग इन छोटे-छोटे संकेतों को बड़ी डरावनी घटनाओं के रूप में सोच लेते हैं. तो अगली बार जब कोई कहे कि रात में कब्रिस्तान जाना खतरनाक है, तो समझ जाइए-यह सिर्फ़ वहम और अफवाह है, हकीकत नहीं.
मैं राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहा हूं. मुझे हिंदी मीडिया में 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. मैंने प्रिंट में रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल मीड…और पढ़ें
मैं राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहा हूं. मुझे हिंदी मीडिया में 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. मैंने प्रिंट में रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल मीड… और पढ़ें