मुंह से सांस ले रहा था बच्चा तभी डॉक्टरों ने पैरेंट्स को दी सलाह, कहा -बच्चे की खातिर छोड़ दो दिल्ली- एनसीआर..यहां जानिए पूरी कहानी
नोएडा: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर 400 के पार जा रहा है. वहीं नोएडा की बात करें, तो ये 300 से 400 के बीच में है, जोकि बेहद खतरनाक श्रेणी में आता है और इसकी वजह से बच्चे, बड़े और बुजुर्गों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. वैसे ये हम नहीं डॉक्टर कह रहे है. नोएडा से पहला ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पेरेंट्स ने अपने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए पॉल्यूशन से आई गंभीर समस्या को लेकर सर्जरी करानी पड़ी है. इसके साथ ही डॉक्टर ने उन्हें सलाह दी है कि अगर आप अपने बच्चे को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो दिल्ली-एनसीआर छोड़ दें.
नाक से नहीं ले पा रहा था बच्चा सांस
मूल रूप से सिरसा हरियाणा का रहने वाले कपल सचिन और साक्षी आज से करीब ढाई साल पहले नोएडा में शिफ्त हुए तभी से उनके करीब पांच वर्षीय बच्चे जयरित को पॉल्यूशन के चलते हेल्थ इश्यूज आने लगे. लेकिन इस बार की सर्दियां शुरू होते ही दिल्ली एनसीआर का AQI लेवल इतना बढ़ा कि पांच साल का जयरित नाक से बिल्कुल सांस न लेकर मुंह से सांस लेने लगा और तो और बच्चे को कोई एंटीबायोटिक मेडिसन फायदा नहीं कर रही थी.
टॉन्सिल्स और एडिनॉइड्स पहुंच गए थे ग्रेड 4 में
लोकल 18 से बात करते हुए कपल ने बताया कि जब हम डॉक्टर के पास गए और जांच कराई तो पता चला टॉन्सिल्स और एडिनॉइड् ग्रेड 4 के हो गए हैं, जिसका लास्ट ऑप्शन सर्जरी है और कुछ नहीं. जिसके बाद सचिन और साक्षी पास के पास सर्जरी के अलावा कोई अल्टरनेटिव ऑप्शन नहीं था. आखिरकार उन्हें सर्जरी के लिए बच्चे को ले जाना पड़ा. एक हफ्ते पहले गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में सर्जरी करवाई है. साथ ही डॉक्टरों ने पेरेंट्स को सलाह दी है कि बच्चे की देखभाल करना बहुत जरूरी है नहीं तो फिर से स्थिति बिगड़ सकती है.
परमानेंट्स सॉल्यूशन के दिल्ली छोड़ने की दी सलाह
सर्जरी के बाद जब पेरेंट्स ने डॉक्टर से परमानेंट सॉल्यूशन के बारे में पूछा तो डॉक्टरों की सलाह सुनकर वे चौक गए. डॉक्टर्स का कहना था दिल्ली-एनसीआर छोड़ दें यही एक आखिरी और सही उपाय है. ऐसी स्थिति में पेरेंट्स असमंजस में हैं कि वो करें तो करे और कहां जाएं. साक्षी भावुक होते हुए बताती है कि हम दोनों ने बड़ी मेहनत करके जॉब हासिल की है, दोनों ही IT कंपनी में इंजीनियर हैं उनका कहना है कि हमने अपना घर-बार बेचकर अब तक की गाढी कमाई से यह घर खरीदा है. अब इतनी जल्दी हम ऐसा कौनसा काम करें जिससे हमारे बच्चे भी स्वस्थ रहे और कोई परेशानी भी न हो. सरकारों को कुछ उचित कदम उठाने चाहिए, ताकि हम और हमारे जैसे लाखों पेरेंट्स जो प्रदूषित वातारण में रहते हैं वह अच्छा और स्वस्थ्य जीवन जी सके.
कुछ इस तरह आती है सर्जरी की नौबत
आपको बता दें कि डॉक्टर के मुताबिक पॉल्यूशन के कारण टॉन्सिल्स और एडिनॉइड्स के सूजन का स्केल ग्रेड 1 से ग्रेड 4 तक मापते हैं. ग्रेड 1 में 0 से 25 प्रतिशत ब्लॉकेज, ग्रेड 2 में 25 से 50 प्रतिशत ब्लॉकेज, ग्रेड 3 में 50 से 75 प्रतिशत ब्लॉकेज और ग्रेड 4 में 75 से 100 प्रतिशत सूजन की वजह से ब्लॉकेज होता है. ज्यादातर मामलों में ग्रेड 3 तक तो दवा असर करती है, लेकिन ग्रेड 4 में कोई भी दवा भी असर नहीं करती. ज्यादातर मामलों में डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं. वैसे जब किसी जगह की AQI 300 के पार जाती है, तो ये समस्या उत्पन्न हो सकती हैं, जिसको पहले से पॉल्यूशन से दिक्कत है उसके चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं. आपको बता दें कि नोएडा एनसीआर में फिलहाल AQI 300 से 400 के बीच है, जो कि बेहद गंभीर श्रेणी में मापा जाता है.