इस्लाम में हलाल-हराम सिर्फ खाने का मसला नहीं; कमाई का ज़रिया सबसे अहम, हराम माल दुनिया और आख़िरत दोनों में लाता है तबाही
Aligarh latest news : जब हम इस्लाम की बात करते हैं, तो अक्सर एक शब्द ज़ेहन में आता है हलाल और हराम. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस्लाम में खाने-पीने से ज़्यादा अहमियत इस बात को दी गई है कि आपकी कमाई का ज़रिया क्या है? चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश, मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन साहब कहते हैं कि ब्याज, रिश्वत और हक मारकर की गई कमाई क्यों हराम है.
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