यूपी का यह गांव भेड़ पालन के लिए था मशहूर,नाम ही पड़ गया भेड़िहारी

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यूपी का यह गांव भेड़ पालन के लिए था मशहूर,नाम ही पड़ गया भेड़िहारी


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Maharajganj news: महराजगंज जिले का भेड़िहारी गांव अपनी विशेष पहचान के लिए जाना जाता है. इस गांव का नाम ही यहां होने वाले भेड़ पालन की परंपरा पर पड़ा है. स्थानीय ग्रामीण पीढ़ियों से भेड़ें पालते आ रहे हैं. भेड़िहारी गांव कभी जिले में भेड़ पालन का प्रमुख केंद्र माना जाता था. इसी वजह से इस गांव का नाम भेड़ों के नाम पर रख दिया गया.

महराजगंज: आपने कई बार ध्यान दिया होगा की बहुत से गांव का नाम बहुत ही अलग और अनोखा होता है. ऐसे नाम के पीछे एक अलग कहानी भी होती है. कई बार तो ऐसा होता है कि नाम ऐसे भी होते हैं जिसका मजाक भी उड़ाते हैं. इसके साथ ही ऐसे कई गांवों के अनोखे नाम को लेकर सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर खूब चर्चा भी होती है और यह नाम तेजी से वायरल भी होते हैं.

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में भी एक ऐसा गांव है जिसके नाम को लेकर खूब चर्चा होती है. यह गांव महराजगंज जिले के भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है. प्राकृतिक सौंदर्य से भरे इस गांव से नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र और जंगल के दृश्य भी दिखाई देते हैं. बॉर्डर क्षेत्र में स्थित इस गांव का नाम भेड़िहारी है जो भेड़ों के पालन से संबंधित है.

भेड़ पालन के लिए प्रसिद्ध था यह गांव

गांव के ही एक स्थानीय ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि एक समय ऐसा था जब इस गांव के ज्यादातर लोग भेड़ का पालन करते थे और इसकी सहायता से ही उनकी आर्थिक स्थिति चलती थी. गांव के कई पशुपालक ऐसे थे जिनके पास सौ से डेढ़ सौ तक की संख्या में भेड़ हुआ करती थी. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में गांव में कोई भेड़ का पालन नहीं करता है लेकिन दशकों पहले यहां पर एक बड़ी संख्या में लोग भेड़ का पालन करते थे और उनसे उनका परिवार भी चलता था. भेड़ का पालन इतनी बड़ी संख्या में होता था कि गांव का नाम भेड़ से संबंधित भेड़िहारी हो गया.

मुसहर समुदाय बहुल आबादी गांव है भेड़िहारी

इस गांव की बात करें तो यह मुसहर बस्ती वाला गांव है जहां पर ज्यादातर लोग लगभग पचास से साठ प्रतिशत मुसहर लोग रहते हैं. वर्तमान समय में भी इस गांव की स्थिति काफी गरीबी वाली है. गांव में जब हम देखते हैं तब ज्यादातर घर कच्चे हैं और बहुत ही मुश्किल से ही कोई पक्का मकान दिखता है. गांव के ही बगल में जिले का एक बड़ा पर्यटन केंद्र दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र मौजूद है. भेड़ों के पालन के लिए मशहूर गांव वर्तमान समय में गरीबी से जूझ रहा है और मुसहर बस्तियों की भी अलग-अलग परेशानियां है.
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