हाईकोर्ट ने पकड़ लिया SP का झूठ, सीधे प्रमुख सचिव को दे दिया आदेश, कहा- जवाब दीजिए अब आप

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हाईकोर्ट ने पकड़ लिया SP का झूठ, सीधे प्रमुख सचिव को दे दिया आदेश, कहा- जवाब दीजिए अब आप


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हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में एसपी बलरामपुर ने हलफनामा दाखिल कर पॉलीग्राफ टेस्ट का नोटिस होने की जानकारी दी. लेकिन ये तथ्य छिपा लिया कि पॉलीग्राफ टेस्ट कराने संबंधी पुलिस का प्रार्थना पत्र बलरामपुर कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट

लखनऊः बलरामपुर जिले में 14 साल की लड़की के साथ हुए रेप मामले में पॉलीग्राफ टेस्ट को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान मामले में हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को जवाब देने अन्यथा कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है. वहीं एसपी बलरामपुर के झूठे शपथ पत्र पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई है. बलरामपुर पुलिस ने अपहरण और दुराचार के एक मामले में नाबालिग पीड़िता और एफआईआर दर्ज कराने वाले उसके पिता को ही पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का नोटिस भेज दिया.

प्रमुख सचिव को जवाब देने का आदेश
हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में एसपी बलरामपुर ने हलफनामा दाखिल कर पॉलीग्राफ टेस्ट का नोटिस होने की जानकारी दी. लेकिन ये तथ्य छिपा लिया कि पॉलीग्राफ टेस्ट कराने संबंधी पुलिस का प्रार्थना पत्र बलरामपुर कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है. हाईकोर्ट ने एसपी बलरामपुर के शपथ पत्र को झूठा करार देते हुए चौंकाने वाला बताया. हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को इस मामले में व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल कर पूरे मामले पर जवाब देने का आदेश दिया. ऐसा न होने पर प्रमुख सचिव गृह को अगली सुनवाई पर कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया.

पिता ने बेटी का बयान दोबारा दर्ज कराने की मांग की
नाबालिक पीड़िता के पिता की याचिका पर हाईकोर्ट डबल बेंच ने आदेश दिया है. याचिका में घटना से संबंधित एफआईआर की विवेचना किसी अन्य जिले में ट्रांसफर करने की मांग की गई है. याचिका पर एसपी बलरामपुर ने जवाबी शपथ पत्र देते हुए कहा कि पीड़िता की ओर से 28 अक्टूबर 2024 और 19 मार्च 2025 को दिए गए बयानों में अंतर है. लिहाजा पीड़िता और उसके पिता को पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का नोटिस दिया गया है. याची की ओर से जानकारी दी गई की 22 अक्टूबर 2024 को दर्ज एफआईआर के संबंध में पीड़िता की ओर से स्थानीय पॉक्सो कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था. प्रार्थना पत्र में कहा गया कि 28 अक्टूबर 2024 को जो बयान पीड़िता ने दिया था वो आरोपी और पुलिस के दबाव में दिया था. लिहाजा उसका बयान दोबारा दर्ज कराया जाए.

राज्य सरकार ने कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में दी चुनौती
उस प्रार्थना पत्र पर पॉक्सो कोर्ट ने 8 जनवरी 2025 को दोबारा बयान दर्ज करने का आदेश दिया. आदेश के अनुपालन में 19 मार्च को दोबारा बयान भी दर्ज कराए गए. लेकिन राज्य सरकार की ओर से 8 जनवरी के बलरामपुर कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई. हाईकोर्ट ने हैरानी जताई कि जिस आदेश को आरोपी चुनौती दे सकता था. उसमें राज्य सरकार को आखिर क्यों याचिका दाखिल करने की जरूरत पड़ी.

एसपी ने शपथ पत्र में बोला झूठ
कोर्ट के संज्ञान में ये भी लाया गया कि पॉलीग्राफ टेस्ट से संबंधित पुलिस के प्रार्थना पत्र को बलरामपुर कोर्ट ने 1 दिसंबर को ही खारिज कर दिया था. लेकिन एसपी ने अपने शपथ पत्र में उस प्रार्थना पत्र के विचाराधीन होने की बात कही. हाईकोर्ट ने झूठा शपथ पत्र दाखिल करने, नाबालिग और पिता का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के मामले में मामले में प्रमुख सचिव गृह को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया. मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी.

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Prashant Rai

प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें

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