इस्लाम में क्या है पत्नी का हक? क्या सच में है उनपर ढेरों पाबंदियां..यहां जाने

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इस्लाम में क्या है पत्नी का हक? क्या सच में है उनपर ढेरों पाबंदियां..यहां जाने


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इस्लाम में पत्नी के अधिकार और ससुराल में उनका सम्मान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. अक्सर समाज में यह देखा जाता है कि शादी के बाद कई लड़कियों को उनके हक और उनकी प्राइवेसी से वंचित किया जाता है, जबकि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार हर पत्नी को सुरक्षा, सम्मान और अपनी निजी आज़ादी का पूरा अधिकार प्राप्त है.

अलीगढ़: इस्लाम में पत्नी के अधिकार और ससुराल में उनका सम्मान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. अक्सर समाज में यह देखा जाता है कि शादी के बाद कई लड़कियों को उनके हक और उनकी प्राइवेसी से वंचित किया जाता है, जबकि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार हर पत्नी को सुरक्षा, सम्मान और अपनी निजी आज़ादी का पूरा अधिकार प्राप्त है. मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन बताते हैं कि ससुराल में पत्नी की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना न सिर्फ जरूरी है, बल्कि यह इस्लाम की सीखों में भी अहम स्थान रखता है.

पत्नी को सम्मान और सुरक्षा देना बेहद जरूरी

शाही चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन बताते हैं कि इस्लाम में पत्नी के हक और अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं. ससुराल में पत्नी को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करना बेहद जरूरी है. पत्नी का दर्जा केवल परिवार की सेविका के रूप में नहीं, बल्कि समान सम्मान प्राप्त करने वाली व्यक्ति के रूप में होना चाहिए.

इस्लाम के अनुसार, पत्नी पर यह पाबंदी नहीं है कि वह ससुराल के अन्य सदस्यों की सेवा या अन्य काम करे. मौलाना मे कहा कि वहीं पत्नी के कुछ निश्चित अधिकार भी हैं, जैसे कि रहने की जगह पति की तरफ से प्रदान की जाएगी, खाना-पीना और अन्य जरूरी चीजें पति और ससुराल की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी.

इस्लाम, ससुराल में पत्नी के अधिकारों और सम्मान को सुनिश्चित करता है

उन्होंने कहा कि इसके अलावा पत्नी को ससुराली जनों की तरफ से सम्मान मिलना भी उसका अधिकार है. साथ ही पत्नी की निजी जिंदगी में किसी प्रकार की दखलअंदाजी नहीं की जानी चाहिए. उसकी व्यक्तिगत बातें, घर या अन्य किसी मामले में उसकी प्राइवेसी का सम्मान किया जाना चाहिए. इस तरह, इस्लाम ससुराल में पत्नी के अधिकारों और सम्मान को सुनिश्चित करता है. इसलिए यह बिल्कुल गलत है जब कोई सास या नंद तंज कसती हैं या अपमानजनक टिप्पणी करती हैं. यह व्यवहार इस्लाम से मेल नहीं खाता और केवल मानसिक सोच या आदत से उत्पन्न होता है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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