KGMU केस: टीम योगी की फेवरेट बनने की चाह में अर्पणा यादव से गलती तो नहीं हुई?
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KGMU Love Jihad Case: राजधानी लखनऊ के केजीएमयू दुष्कर्म और जबरन धर्मांतरण के मामले में अपर्णा यादव की एंट्री से मामला राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है. अपर्णा यादव और उनके सर्मथकों की केजीएमयू स्टाफ और डॉक्टरों से बहस के बाद अब हड़ताल और ओपीडी सेवाओं को ठप करने की चेतावनी दी गई है. जानकारों का कहना है कि अपर्णा यादव की एंट्री से विपक्ष को मुद्दा मिल सकता है.
लखनऊ. राजधानी लखनऊ के केजीएमयू में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और लव जिहाद के मामले में अब नया मोड़ आ गया है. सोमवार को महिला आयोग की अध्यक्ष अपर्णा यादव के साथ केजीएमयू में हुई झड़प और बहस के बाद डॉक्टर और कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. डॉक्टरों और स्टाफ ने हड़ताल और ओपीडी बंद करने की चेतावनी दी है. दरअसल, डॉ रमीज के धर्मांतरण मामले में कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद की प्रेस कांफ्रेंस से पहले अपर्णा यादव के समर्थकों के साथ केजीएमयू के डॉक्टरों और स्टाफ के साथ झड़प हुई थी. कहा जा रहा है कि योगी टीम की फेवरेट बनने की चाह में कहीं गलती तो नहीं हो गई. क्योंकि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ज्वाइन करने के बाद से ही उन्हें पार्टी ने न तो लोकसभा में टिकट दिया है और महिला आयोग की अध्यक्ष का पद भी नहीं मिला. 2027 में टिकट मिलेगा भी की नहीं ये तय नहीं है.
मामले में राजनीतिक विवाद की उम्मीद
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केजीएमयू पहले से ही दुष्कर्म और लव जिहाद के आरोपों से जूझ रहा है. महिला डॉक्टर की शिकायत पर जांच चल रही है, लेकिन अब अपर्णा यादव की दखलंदाजी ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम में ‘फेवरेट’ बनने की कोशिश का नतीजा है? अपर्णा यादव, जो मुलायम सिंह यादव की बहू हैं, ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जॉइन की थी. उस समय से उन्हें पार्टी में कोई बड़ा पद या लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला है. अब 2027 के चुनावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या उन्हें टिकट मिलेगा या नहीं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
हड़ताल से बढ़ेगी मरीजों की परेशानी
केजीएमयू प्रशासन ने अभी तक इस झड़प पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि कुलपति प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले की जांच और निष्पक्षता पर जोर दे रही थीं. वहीं, डॉक्टरों के संगठन ने मांग की है कि बाहरी हस्तक्षेप बंद हो और अस्पताल की सेवाओं को प्रभावित न किया जाए. यदि हड़ताल हुई तो हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. उत्तर प्रदेश महिला आयोग की ओर से भी कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अपर्णा यादव के करीबियों का कहना है कि वे पीड़ित महिला डॉक्टर के न्याय के लिए ही कैंपस पहुंची थीं. हालांकि, इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे संवेदनशील मामलों में दखल उचित है?
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अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें