कभी शाहजहांपुर की इस नदी से होता था व्यापार! गर्रा नदी का वैभवशाली अतीत, जिससे नगरपालिका को मिलती थी 25% आय

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कभी शाहजहांपुर की इस नदी से होता था व्यापार! गर्रा नदी का वैभवशाली अतीत, जिससे नगरपालिका को मिलती थी 25% आय


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Garra River Shahjahanpur: शाहजहांपुर के इतिहास में गर्रा नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि कभी जिले की आर्थिक, औद्योगिक और व्यापारिक रीढ़ हुआ करती थी. रेल मार्ग आने से पहले यही नदी देश के बड़े व्यापारिक रास्तों से शाहजहांपुर को जोड़ती थी. इसके किनारे बसे बंदरगाह, कारखाने और धार्मिक स्थल आज भी उस स्वर्णिम दौर की गवाही देते हैं. समय के साथ इसकी भूमिका बदली जरूर है, लेकिन गर्रा नदी की कहानी आज भी जिले की पहचान से गहराई से जुड़ी हुई है.

शाहजहांपुर: जिले के गौरवशाली इतिहास में गर्रा नदी का विशेष स्थान है. कुमाऊं की पहाड़ियों से निकलकर ‘देवहा’ के रूप में बहती यह नदी शाहजहंपुर की पश्चिमी सीमा निर्धारित करती है. ब्रिटिश गजेटियर के अनुसार, शाहजहंपुर जल संसाधनों में उत्तर प्रदेश के सबसे संपन्न जिलों में से एक रहा है. रेल मार्ग के आने से पूर्व, गर्रा नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि एक ‘रिवर हाईवे’ थी, जिसने शाहजहंपुर को देश के व्यापारिक मानचित्र पर स्थापित किया. आज भी यहां स्थित पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा और ऐतिहासिक कारखानों के अवशेष इस नदी के स्वर्ण काल की कहानी बयां करते हैं.

इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि गर्रा नदी शाहजहंपुर की आर्थिक और औद्योगिक रीढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता इसका ‘जल परिवहन मार्ग’ होना था. पीलीभीत से कन्नौज होते हुए यह गंगा के माध्यम से पूरे भारत को शाहजहंपुर से जोड़ती थी. अज़ीज़गंज का प्राचीन बंदरगाह इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जहां से होने वाले व्यापार से नगरपालिका को अपनी आय का 25% हिस्सा चुंगी के रूप में मिलता था. चीनी और लकड़ी के व्यापार के साथ-साथ यहां बड़े जहाजों का आवागमन होता था. ब्रिटिश काल में प्रसिद्ध ‘केरू फैक्ट्री’ का कन्नौज से यहां स्थानांतरित होना भी गर्रा की जल वहन क्षमता के कारण ही संभव हुआ था. यह नदी न केवल उद्योगों को जीवन देती थी, बल्कि महासीर मछली के प्रचुर भंडार के कारण भी विख्यात थी.

जल मार्ग से होता था व्यापार
गर्रा नदी ने सदियों तक शाहजहंपुर को एक औद्योगिक केंद्र के रूप में जीवंत रखा है. रेल नेटवर्क के विस्तार से पहले तक यह नदी व्यापार का मुख्य मार्ग हुआ करती थी, नदी के रास्ते ही भारी मात्रा में लकड़ी और चीनी का निर्यात होता था. अज़ीज़गंज बंदरगाह की समृद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह स्थानीय प्रशासन की आय का मुख्य स्रोत था. मानसूनी मौसम में बड़े जहाजों का यहां तक आना शाहजहंपुर की वैश्विक कनेक्टिविटी को दर्शाता है. इसी नदी की सुगमता के चलते यहां ट्राम जैसी आधुनिक सुविधाएं आईं, जिसने शाहजहंपुर को एक प्रमुख व्यापारिक हब बनाया.

लगातार बदलती है धारा 
भौगोलिक दृष्टि से गर्रा नदी की प्रकृति अत्यंत अनोखी है. रिवर बैंक्स न होने के कारण यह हर साल अपना विस्तार करती है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ आती है और नई उपजाऊ मिट्टी का जमाव होता है. उत्तर से दक्षिण की ओर धीमे ढाल के कारण इसकी धारा निरंतर प्रवाहित रहती है. हालांकि, आधुनिक काल में रेलमार्गों और राजमार्गों के विकास के साथ जल परिवहन का महत्व कम होता गया और नदियों के जलस्तर में भी गिरावट आई है. इसके बावजूद सैकड़ों वर्षों तक गर्रा ने शाहजहंपुर की प्राणवाहिनी के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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