कम खर्च में कमाना है ज़्यादा मुनाफा, तो करें मछली पालन..यहां जानिए सबकुछ
अलीगढ़: बढ़ती लागत और घटती ज़मीन के बीच किसान अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जिसमें कम खर्च में ज़्यादा मुनाफा मिल सके. ऐसे में मछली पालन एक ऐसा क्षेत्र बनकर उभरा है, जो वैज्ञानिक आधार पर न सिर्फ़ अधिक उत्पादन देता है, बल्कि कम जगह और कम खुराक में बेहतर आय की उम्मीद भी दिखाता है. यही वजह है कि आज मछली पालन को पारंपरिक पशुपालन के मुकाबले ज़्यादा फायदेमंद माना जा रहा है. आइये जानते हैं विस्तार से.
मछली पालन फायदे का सौदा
एएमयू के जूलॉजी विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद अफ़ज़ल खान बताते हैं कि अक्सर यह कहा जाता है कि दूसरे मवेशियों या पशुपालन की तुलना में मछली पालन ज़्यादा फायदेमंद होता है. दरअसल, इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण हैं. मछलियां कोल्ड-ब्लडेड जीव होती हैं, यानी उन्हें अपने शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ती. यही वजह है कि अगर मछली को एक किलो खुराक दी जाए, तो आदर्श परिस्थितियों में उसका वजन लगभग एक किलो तक बढ़ सकता है, जबकि इसके उलट जब हम गाय, भैंस, बकरी या अन्य पशुओं का पालन करते हैं, तो उन्हें एक किलो वजन बढ़ाने के लिए तीन से छह किलो तक चारा खिलाना पड़ता है.
पशुपालन में कुल लागत का लगभग 60 से 80 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ खुराक पर ही खर्च हो जाता है, जबकि मछली पालन में यह खर्च काफी कम होता है. कम खुराक में ज्यादा वजन बढ़ना ही मछली पालन को आर्थिक रूप से ज्यादा लाभकारी बनाता है.
कम जगह में ज्यादा मुनाफा
प्रोफेसर का कहना है कि मछली पालन का एक बड़ा फायदा यह भी है कि कम जगह में ज्यादा संख्या में मछलियों को पाला जा सकता है. अन्य जानवरों के मुकाबले मछलियों की संख्या प्रति यूनिट क्षेत्र कहीं अधिक होती है, जिससे उत्पादन भी ज्यादा मिलता है. यही कारण है कि वजन के हिसाब से भी और लागत के हिसाब से भी मछली पालन अधिक मुनाफे वाला व्यवसाय माना जाता है.
भारत में मछली पालन की एक बेहद लोकप्रिय और सफल तकनीक है पॉलीकल्चर. पॉलीकल्चर का मतलब होता है एक ही तालाब में एक से ज्यादा प्रजातियों की मछलियों को एक साथ पालना. इसमें सबसे ज्यादा प्रचलित कॉम्बिनेशन है रोहू, कतला और मृगल. यह प्रणाली भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में काफी सफल मानी जाती है.
इन तीन मछलियों को पा जा सकता है एकसाथ
उन्होंने बताया कि आज भारत के लगभग हर हिस्से में इंडियन मेजर कार्प्स का पॉलीकल्चर सफलतापूर्वक किया जा रहा है और यह मॉडल पूरी दुनिया में कारगर साबित हो चुका है. यह कहना गलत नहीं होगा कि दूसरे किसी भी जानवर के पालन की तुलना में मछली पालन से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है.
मछली पालन रोजगार और आय का बड़ा साधन
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य पशुपालन को छोड़ दिया जाए. हर क्षेत्र के अपने फायदे हैं. लेकिन भविष्य को देखते हुए, जब ज़मीन सीमित होती जा रही है और जल संसाधन अपेक्षाकृत उपलब्ध हैं, मछली पालन एक बेहद संभावनाओं वाला क्षेत्र बनकर उभर रहा है. खासतौर पर भारत जैसे देश में, जहां जल स्रोतों की भरपूर उपलब्धता है, मछली पालन रोजगार और आय का बड़ा साधन बन सकता है, बल्कि आने वाले समय में यह एक मजबूत और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में भी स्थापित हो सकता है.