‘सरकार खुलकर दे स्पष्टीकरण..’, UGC कानून के खिलाफ अयोध्या में उबाल, जनता की सरकार से अपील

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‘सरकार खुलकर दे स्पष्टीकरण..’, UGC कानून के खिलाफ अयोध्या में उबाल, जनता की सरकार से अपील


अयोध्या: पूरे देश में यूजीसी कानून का विरोध चल रहा है. सामान्य जाति के लोग इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी पार्टी के कई नेताओं ने भी इस कानून के विरोध में भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं. इतना ही नहीं, इस कानून को लेकर साधु-संत भी खुलकर सरकार का विरोध कर रहे हैं और कानून को वापस करने की बात करते दिखाई दे रहे हैं. इसी बीच जब इस कानून को लेकर अयोध्या के स्थानीय लोगों से बातचीत की गई, तो स्थानीय लोगों ने भी इसका खुलकर विरोध किया और स्थानीय लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी.

मंदिर और मूर्तियों की नगरी अयोध्या के लोगों ने यूजीसी कानून को गलत बताया है. सरकार से अपील की है कि इस कानून को सरकार जल्द से जल्द वापस ले. इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने कहा कि इस कानून से देश में गृह युद्ध जैसी स्थिति भी उत्पन्न होगी. साथ ही सरकार को इस पर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए.

सरकार वापस ले कानून

स्थानीय आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि यूजीसी कानून को तत्काल प्रभाव से सरकार को वापस लेना चाहिए. सरकार को क्षमता के साथ वापस लेना चाहिए. सामान्य जाति के समाज से सरकार को क्षमा मांगनी चाहिए. सरकार को इस बारे में खुलकर बताना चाहिए कि हमसे भूल हुई है. हम यह कानून वापस ले रहे हैं.

इस पूरे मामले पर अब सरकार का स्पष्टीकरण आना चाहिए, क्योंकि पूरे देश में इसका विरोध चल रहा है. एक आम नागरिक होने के नाते सरकार से हम लोग निवेदन करते हैं कि इस कानून को जल्द से जल्द वापस करें, वरना देश में गृह युद्ध जैसी स्थिति भी उत्पन्न होगी.

सरकार का पक्ष सामने नहीं

दूसरी तरफ कमलाकांत सुंदरम ने बताया कि यूजीसी अपने कुछ प्रावधान सुनिश्चित की है. इस कानून को लेकर चारों तरफ भारी विरोध चल रहा है. हालांकि सरकार का भी कोई पक्ष इस मामले पर खुलकर नहीं सामने आया है. पूरे देश में विरोध का दौर चल रहा है. सरकार को इस पर खुलकर आना चाहिए, हम लोग यही चाहते हैं.

जनता की पीएम और शिक्षा मंत्री से अपील

वहीं स्थानीय सिद्धांत दुबे ने बताया कि हम एक युवा हैं और हम सामान्य जाति से आते हैं. यह कानून जातिगत भेदभाव का एक प्रतीक है और मेरे हिसाब से यह नहीं होना चाहिए. इस कानून को सरकार को वापस लेना चाहिए. शिक्षा मंत्रालय और सरकार को इस कानून के बारे में स्पष्ट करना चाहिए. क्या समाज में सामान्य जाति का कोई अस्तित्व नहीं है, क्या सामान्य जाति के लोग ही भेदभाव करते हैं, सभी का शोषण करते हैं, यह कहां पर लिखा हुआ है. हमारी अपील देश के प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री से है कि इस कानून को या तो वापस लिया जाए या तो इस कानून को संशोधन करके सबको एक बराबर देखा जाए.



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