गर्मियों में उगाएं मोटा मुनाफा! फरवरी में इन सब्जियों की खेती क्यों है लाभदायक
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किसान यदि सही समय पर फसलों की बुवाई करता है, तो उसे अच्छी कमाई का अवसर मिलता है. फरवरी का महीना हरी सब्जियों की खेती के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि यह मौसम और तापमान दोनों के लिहाज से आदर्श होता है. इस महीने में किसान पालक, लौकी, कद्दू, भिंडी, शिमला मिर्च और पत्तागोभी जैसी सब्जियों की खेती करके बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा कमा सकता है.
सर्दियों के मौसम में पालक की खेती करना अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस समय पालक की फसल अच्छी तरह उगती है और तेजी से बढ़ती है. फरवरी का महीना पालक लगाने के लिए उपयुक्त माना जाता है. पालक एक ऐसी सब्जी है, जिसकी मांग साल भर बनी रहती है और इसे सब्जियों में एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है. पालक में आयरन और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा पाई जाती है. इसकी बुवाई के लगभग 40–45 दिनों के भीतर फसल की कटाई की जा सकती है. पालक की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी का चयन करना चाहिए. गर्मी शुरू होते ही पालक अच्छे दामों पर बिकती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है.

पत्तागोभी की बुवाई के लिए हल्की सर्दियों का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस मौसम में तापमान अनुकूल रहने से फसल अच्छी तरह उगती है, इसलिए फरवरी का महीना पत्तागोभी लगाने के लिए सबसे अच्छा समय होता है. पत्तागोभी की मांग बाजारों में साल भर बनी रहती है और इसका उपयोग सबसे अधिक दुकानों और होटलों में किया जाता है. इसकी बुवाई के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी का चयन करना चाहिए और मेड बनाकर बुवाई करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं. पत्तागोभी की फसल को लगातार देखभाल की आवश्यकता होती है. मजबूत पौधों में ठोस और स्वस्थ पत्तागोभी बनती है, जो गर्मियों की शुरुआत में कटाई के लिए तैयार हो जाती है और किसानों को अच्छी आमदनी दिलाती है.

शिमला मिर्च की फसल पहले मुख्य रूप से केरल में उगाई जाती थी, लेकिन आधुनिक तकनीक और बदलते मौसम के कारण अब इसे भारत के लगभग सभी राज्यों में उगाया जा रहा है. फरवरी में शिमला मिर्च की खेती करने से किसान को बेहतर उत्पादन और अच्छा लाभ मिल सकता है. शिमला मिर्च की सीधी बुवाई नहीं की जाती, इसके लिए पहले नर्सरी तैयार की जाती है, जिसे तैयार करने में लगभग 25–30 दिन का समय लगता है. इसके बाद पौधे रोपाई के लिए तैयार होते हैं. रोपाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करें और इसमें गोबर की खाद का उपयोग अवश्य करें, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन प्रभावित नहीं होता. शिमला मिर्च के पौधों की रोपाई के लगभग 60–70 दिन बाद पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. इस तरह शिमला मिर्च की खेती 4–5 महीने में पूरी होती है और कम समय में किसानों को अच्छा मुनाफा भी मिलता है.
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भिंडी की फसल सबसे आसान और तेजी से बढ़ने वाली सब्ज़ियों में से एक मानी जाती है. इसलिए भिंडी की बुवाई के लिए फरवरी का महीना सबसे उपयुक्त समय होता है. बुवाई से पहले बीज को साफ पानी में भिगोकर कुछ समय रखा जाए, फिर सूखा कर बुवाई करें. बीज बुवाई के लगभग 35–40 दिनों में फसल की तुड़ाई शुरू हो जाती है. भिंडी की फसल का समय लगभग 3–4 महीने होता है, जिससे किसान सही समय पर बुवाई करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

कद्दू की खेती मुख्य रूप से दो सीजन में की जाती है. गर्मियों में फरवरी–मार्च और बरसात में जून–जुलाई. बेहतर मुनाफे के लिए फरवरी–मार्च में बुवाई करना सबसे उत्तम माना जाता है. कद्दू की फसल लगभग 90–120 दिनों की होती है. इस समय बुवाई करने से गर्मियों में अच्छे दामों पर बिक्री हो जाती है और किसान को अच्छा मुनाफा मिलता है. कद्दू की बुवाई से पहले खेतों को तीन–चार बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना चाहिए. इसके बाद गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट खाद मिलाकर खेत को समतल करें और पानी का निकास सही ढंग से सुनिश्चित करें. इस तरह की तैयारी से फसल स्वस्थ रहती है और किसानों को लाभ मिलता है.

करेले की बुवाई साल में दो सीजन में की जाती है. गर्मी के लिए इसे जनवरी–मार्च के बीच बुवाई किया जा सकता है, जिसमें जनवरी और फरवरी का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है. अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए किसान इसी समय का चयन करके बुवाई करें. चाहे सर्दी हो या गर्मी, करेले की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे किसान को निरंतर आय का अवसर मिलता है.