‘टीवी ही भला था… मोबाइल के अकेलेपन ने छीन ली बच्चों की मुस्कान’, गाजियाबाद की भारत सिटी हादसे के बाद बोले पेरेंट्स

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‘टीवी ही भला था… मोबाइल के अकेलेपन ने छीन ली बच्चों की मुस्कान’, गाजियाबाद की भारत सिटी हादसे के बाद बोले पेरेंट्स


Ghaziabad Triple Suicide Case: गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र स्थित भारत सिटी सोसाइटी में मंगलवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां तीन नाबालिग बहनों ने नौवीं मंजिल के फ्लैट की बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली. प्रारंभिक जांच और परिजनों की जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक कदम के पीछे कोरियन गेम और कोरियन स्टाइल को लेकर बढ़ता जुनून बताया जा रहा है. तीनों बच्चियां कोरियन स्टाइल को इस कदर फॉलो करती थीं कि परिवार की किसी भी बात को मानने को तैयार नहीं थीं.

इस हृदयविदारक घटना के बाद भारत सिटी सोसाइटी में मातम का माहौल है. हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया बल्कि यहां रहने वाले अन्य माता-पिता के मन में भी अपने बच्चों को मोबाइल फोन देने को लेकर डर और चिंता बढ़ा दी है. सोसाइटी के लोग इस बात को लेकर सहमे हुए हैं कि कहीं मोबाइल फोन और गेमिंग एप की लत उनके बच्चों के भविष्य पर भी असर न डाल दे.

‘मोबाइल अब जरूरत नहीं, डर का कारण है’
भारत सिटी में रहने वाली पूजा ने बताया कि जैसे ही उन्हें इस घटना की जानकारी मिली वह बेहद घबरा गईं. उनका कहना है कि अब बच्चों को मोबाइल फोन देने से डर लगने लगा है. पूजा ने कहा कि भले ही मोबाइल फोन आज के समय में ऑनलाइन पढ़ाई और जानकारी के लिए जरूरी हो गया हो लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि माता-पिता को यह समझना होगा कि सुविधा और लापरवाही के बीच की सीमा बहुत पतली है.

सोशल मीडिया, गेमिंग एप और मोबाइल फोन की लत अब केवल बच्चों तक ही सीमित नहीं रही बल्कि कई बार माता-पिता भी इसकी चपेट में आ चुके हैं. ऐसे में बच्चों पर नजर रखना और यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि वे मोबाइल पर क्या देख रहे हैं और किस तरह के गेम या वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. सोसाइटी में लगातार चर्चा हो रही है कि आखिर एक मोबाइल फोन ने तीन मासूम जिंदगियों को छीन लिया और पूरा परिवार उजड़ गया.

अकेलेपन ने बढ़ाई दूरियां
सोसाइटी में रहने वाले काशी ने बताया कि इस दर्दनाक हादसे की जानकारी मिलने के बाद से वह गहरे सदमे में हैं. उनका कहना है कि यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि एक मोबाइल फोन तीन बच्चियों की मौत का कारण बन गया. काशी का मानना है कि बच्चों को मोबाइल फोन का सीमित और सोच-समझकर उपयोग ही करने देना चाहिए, क्योंकि इसका ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है. कहा कि अगर बच्चों को कुछ देखना ही है तो मोबाइल फोन की बजाय टीवी बेहतर विकल्प हो सकता है.

क्योंकि, टीवी पर परिवार के साथ बैठकर देखा जाता है और माता-पिता को यह पता रहता है कि बच्चा क्या देख रहा है. इसके उलट मोबाइल फोन पर बच्चे अक्सर अकेले रहते हैं और माता-पिता को उनकी गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे धीरे-धीरे लत लग जाती है. चाइनीज और कोरियन गेम्स बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डालते हैं. इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि आज के दौर में ज्यादातर माता-पिता दोनों ही कामकाजी हैं, जिससे बच्चों के साथ संवाद कम हो गया है. यह कम्युनिकेशन गैप बच्चों को माता-पिता से दूर कर देता है और बच्चा मोबाइल फोन को ही अपना साथी मानने लगता है.

खतरनाक गेमिंग ऐप और वेबसाइटों पर लगाई जाए रोक
वही, सोसाइटी निवासी नंदिनी ने बताया कि इस दर्दनाक हादसे की जानकारी मिलते ही वह हैरान रह गईं. उनका कहना है कि इस घटना ने सभी माता-पिता को डरा दिया है. हादसे के बाद से माता-पिता के मन में बच्चों को मोबाइल फोन देने को लेकर डर बैठ गया है. नंदिनी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता कई बार यह नहीं जान पाते कि उनका बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है. उन्होंने बताया कि अब सभी माता-पिता पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं और बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर नजर रख रहे हैं. नंदिनी ने सरकार से भी मांग की कि ऐसे खतरनाक गेमिंग एप और वेबसाइटों पर रोक लगाई जाए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े.

सतर्कता ही समाधान, मोनिका सिन्हा का अनुभव
सोसाइटी निवासी मोनिका सिन्हा ने बताया कि इस हादसे के बाद से उनके मन में लगातार डर बना हुआ है. कहा कि मोबाइल फोन और गेमिंग एप की वजह से पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं. मोनिका ने बताया कि कुछ समय पहले जब उन्होंने देखा कि उनका बेटा मोबाइल गेम के प्रति ज्यादा आकर्षित हो रहा है तो उन्होंने तुरंत मोबाइल पर नियंत्रण कर लिया. अब बच्चा मोबाइल पर जो भी देखता है उसकी जानकारी पहले माता-पिता को मिलती है.

इस हादसे के बाद से माता-पिता के मन में बच्चों को मोबाइल फोन देने को लेकर डर बैठ गया है. हालांकि पढ़ाई के लिए कई बार फोन देना जरूरी हो जाता है लेकिन माता-पिता को पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए. मोनिका ने बच्चों को आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रेरित करने और माता-पिता व बच्चों के बीच बातचीत बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने सरकार से भी जागरूकता कार्यक्रम चलाने और सख्त कानून लागू करने की मांग की ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.



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