स्टीकरों से ढकी अल्फा-2 सेक्टर की दीवारें, बदहाल हुई शहर की व्यवस्थाएं, लोगों ने की यह मांग
ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने के दावे लगातार किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है. ग्रेटर नोएडा के प्रमुख सेक्टरों में गिने जाने वाले अल्फा-2 सेक्टर में व्यवस्थाएं दिन-ब-दिन बदहाल होती जा रही हैं. हालात यह हैं कि दिशा बताने वाले साइन बोर्ड, बस स्टॉप, सार्वजनिक भवन, बिजली पैनल और यहां तक कि घरों की दीवारें भी अवैध स्टीकरों से पूरी तरह ढक चुकी हैं. इससे न केवल सेक्टर की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि आम लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है.
अल्फा-2 के अध्यक्ष सुभाष भाटी ने सेक्टर की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए बताया कि सेक्टर के अंदर बने बस स्टॉप प्रतिदिन सैकड़ों लोगों द्वारा उपयोग किए जाते हैं, लेकिन उनकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है. अल्फा-2 से गामा की ओर जाने वाले मार्ग के सर्विस रोड पर बने बस स्टॉप लंबे समय से मरम्मत के इंतजार में हैं. छतें टूटी हुई हैं, बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है और आसपास गंदगी फैली रहती है, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा होती है. सबसे बड़ी समस्या सेक्टर में लगे दिशा-सूचक बोर्डों की है. बताया कि इन साइन बोर्डों पर प्राधिकरण द्वारा लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन आज वे अपनी पहचान ही खो चुके हैं. लगभग सभी बोर्डों पर प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के स्टीकर चिपकाए गए हैं. कई जगह तो साइन बोर्ड पूरी तरह स्टीकरों से ढक चुके हैं, जिससे बाहर से आने वाले लोगों को यह समझ ही नहीं आता कि उन्हें किस दिशा में जाना है. उन्होंने यह भी बताया कि पहले नियम था कि सार्वजनिक संपत्ति पर स्टीकर या पोस्टर लगाने पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता था. हैरानी की बात यह है कि आज भी स्टीकरों पर संबंधित लोगों के मोबाइल नंबर साफ दिखाई देते हैं, बावजूद इसके उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. इससे साफ है कि नियम तो मौजूद हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हो रहा.
स्थानीय निवासी अनिता गौतम ने बताया कि सेक्टर में बने बारात घर की दीवारें पूरी तरह स्टीकरों से ढकी हुई हैं. इसके अलावा बिजली के पैनल, ट्रांसफार्मर और घरों की बाहरी दीवारों पर भी बड़े पैमाने पर स्टीकर लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि इन स्टीकरों को हटाने और दोबारा पेंट कराने में लाखों रुपये खर्च होते हैं. इससे न केवल सरकारी धन का नुकसान होता है, बल्कि सेक्टर की सुंदरता और प्रॉपर्टी की वैल्यू भी प्रभावित होती है.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो सेक्टर की स्थिति और भी खराब हो सकती है. लोगों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जुर्माने की व्यवस्था को फिर से प्रभावी बनाया जाए और सेक्टर में नियमित निगरानी की जाए.
वहीं इसलिए मामले में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अर्बन सर्विसेस के वरिष्ठ प्रबंधक राजेश गौतम ने बताया कि केंद्र बन रहे हैं जल्द ही एग्रेसिव कुत्तों को विस्थापित किया जाएगा.