108 शिवलिंग, 12 ज्योतिर्लिंग, ऊपर छत नहीं लेकिन औरंगजेब ने टेक दिए थे घुटने, अनोखी है इस शिवमंदिर की कहानी
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Mahashivratri news: भगवान शिव के अनंत रूप अनंत नाम है लेकिन अमेठी जिले के कुछ ऐसे शिव मंदिर है जिनकी कहानी दिलचस्प है. कोई मंदिर ऐसा है जहां पर आज तक छत ही नहीं पड पाई तो कोई मंदिर ऐसा है. जहां भगवान को ही श्राप के बाद वहां बस जाना पड़ा कोई मंदिर ऐसा भी है जहां औरंगजेब भी भगवान से जंग हार गए अमेठी के अलग-अलग मौजूद शिव मंदिर बेहतर है इनकी कहानी अनोखी है आईए जानते है.
अमेठी जिलें के गौरीगंज तहसील के रोहसी बुजुर्ग गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर की अनोखी कहानी है. पहले यहा प्राचीन जंगल हुआ करता था एक रात मंदिर की स्थापना करने वाले भक्तों को स्वप्न में भगवान भोलेनाथ ने दर्शन दिए और मंदिर बनवाने की बात कही इसके बाद उन्होंने यहां पर 108 शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंग के साथ पंचमुखी शिव प्रतिमा स्थापित कराई गई. यहां दर्शन करने से मान्यता है कि अकाल मृत्यु टल जाती है और कभी किसी व्यक्ति को कालसर्प दोष की समस्या नहीं होती- पुजारी श्री बल्लभाचार्य महराज

अमेठी जिलें के मुसाफिरखाना के ऐतिहासिक इलाके में स्थित दंडेश्वर महाराज का आश्रम है. इस मंदिर का नाम दंडेश्वर धाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां पर भोलेनाथ को श्राप मिला है. भगवान शिव को यहां शिला के रूप में ऋषि मुनियों ने परिवर्तित कर दिया. जिसके बाद दंड स्वरूप उन्हें यही बस जाना पड़ा. इसके बाद इस मंदिर का नाम दंडेश्वर धाम हो गया. मंदिर काफी प्राचीन है. अमेठी जिले के मुसाफिर के खाना तहसील के कोछित गांव में स्थित गोमती नदी के किनारे यह मंदिर विराजमान है जहां प्रत्येक सोमवार के साथ-साथ सावन महीने में और महाशिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ होती है.

तपेश्वर नाथ धाम मंदिर अमेठी जिले के फुर्सतगंज के पीढ़ी गांव में स्थित है. इस गांव में बने शिव मंदिर में आज तक छत नहीं पढ़ पाई जब भी यहां छत डालने का प्रयास किया जाता है तो छत गिर जाती है यह मंदिर भी अपने आप में प्राचीन है यहां पर राम बारात शिव बारात के साथ प्राचीन मेला भी लगता है. खास बात है कि मंदिर में हिंदू समाज के लोगों के साथ मुस्लिम समाज के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है. मुकुट नाथ धाम मंदिर भी भक्तों की आस्था का केंद्र है यह मंदिर इसलिए भक्तों की आस्था का केंद्र है क्योंकि यहां राजा अपना मुकुट रखा करते थे इसके साथ ही एक बार गांव में जब सूखा पड़ा तो लोगों ने शिवलिंग को पूरा डुबो दिया फिर उसके अगले दिन वर्षा हुई ऐसा भक्तों का मानना है मंदिर काफी प्राचीन होने के साथ-साथ भक्तों की आस्था के केंद्र इसलिए है क्योंकि यहां आज तक किसी प्रकार की कोई अनहोनी मंदिर में या फिर मंदिर के आसपास के लोगों को नहीं हुई ऐसे में भक्त यहां दर्शन पूजन करने आते हैं यह मंदिर सैकड़ो वर्ष पुराना है और इसका नाता राज परिवार से भी है
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बिलेश्वर महादेव मंदिर भी काफी प्राचीन मंदिर में शुमार है. इस मंदिर पर सैकडो वर्ष पहले मुगलों ने आक्रमण किया था जहां औरंगजेब ने इस मंदिर पर आक्रमण कर मंदिर को कब्जे में लेकर अपना साम्राज्य स्थापित करने की ठानी थी लेकिन वह खुदाई करता गया और जितना वह खुदाई करता उतनी गहरी शिवलिंग निकलती जाती अंत में वह थक हार कर क्षमा याचना कर यहां से चला गया ऐसे में यह मंदिर भी काफी प्राचीन है और दिव्य है जो भक्तों की आस्था का केंद्र है यह मंदिर अमेठी जिले के जामों क्षेत्र में स्थित है आज भी मंदिर में प्राचीन खंडित मूर्तियां इतिहास की गवाही है.