छत में दरारें, दीवारों से झड़ रही पपड़ी… आंगनवाड़ी की ऐसी जर्जर हालत, बच्चों को भेजने से डर रहे हैं मां-बाप
अमेठी: जिले के ननिहालों के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है. एक तरफ सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया, तो बढ़ेगा इंडिया’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जिले के भविष्य की बुनियाद यानी आंगनबाड़ी केंद्र खुद ढ़हने की कगार पर है. जिले के कई केंद्रों की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि वहां मासूमों को भेजना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है. छतों पर मौजूद गहरी दरारें और सुविधाओं का अभाव प्रशासन की उदासीनता पर सवाल खड़ा कर रहा है. ऐसे में कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे बच्चों को खतरा है.
मौत के साये में बचपन
तस्वीरें अमेठी के स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्रों की हैं, जहां गौरीगंज तहसील की अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र जर्जरता का शिकार हो गए हैं. इसके साथ ही लोकल 18 की टीम ने स्थानीय केंद्रों पर जाकर वहां के हालात देखे, तो तस्वीरें बेहद डरावनी मिलीं. इन केंद्रों पर छतें पूरी तरह दरारों से भरी पड़ी हैं.
आलम यह है कि आने वाले मानसून के बाद कभी भी इन केंद्रों पर बड़ा हादसा हो सकता है, जिसका अंदेशा अभिभावक जता रहे हैं. बारिश के दिनों में ये छतें कभी भी ढह सकती हैं, जिससे मासूम बच्चे किसी बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं.
बुनियादी सुविधाओं के नाम लापरवाही
आंगनवाड़ी केद्रों में सिर्फ इमारत ही कमजोर नहीं, बल्कि यहां पर बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है. जैसे शौचालय स्वच्छ पेयजल के साथ-साथ सफाई में भी लापरवाही की जा रही है. आंगनबाड़ी केंद्र में झाड़ झंकार कटीले पौधे के साथ जंगल मौजूद हैं, जो बच्चों के लिए कभी भी खतरा कर सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी प्रशासन इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है.
शिकायतों का अंबार, फिर भी प्रशासन मौन
स्थानीय निवासी रामचंद्र मौर्य का कहना है कि इस बदहाली को लेकर कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गई हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. वहीं एक और अभिभावक विवेक कुमार ने बताया कि हम अपने बच्चों को इस खतरे में पढ़ने भेजते हैं. प्रशासनिक अधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए और समस्या को खत्म करना चाहिए, जिससे हादसा ना हो और बच्चे सुरक्षित पढ़ाई कर सकें. साथ ही बुनियादी सुविधाएं भी बेहतर हो सकें.
आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर
वहीं पूरी समस्या को लेकर बाल विकास विभाग अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने फोन पर बातचीत में बताया कि जो आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर हैं, उनकी मैपिंग की जा रही है. कुछ आंगनबाड़ी केंद्र बजट के अभाव में व्यवस्थित नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन सभी को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है. जहां पर आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर है, वहां पर वैकल्पिक समाधान निकाला जा रहा है, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की लापरवाही और अन्य समस्याओं के कारण यदि कहीं शिकायत मिली, तो शिकायत पर कड़ी कार्रवाई होगी.