मसाने की होली 2026: परंपरा या अशास्त्रीय प्रचलन? काशी में छिड़ी बहस
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Masane Holi 2026 को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. Banaras Hindu University के ज्योतिष विभाग के हेड और विद्वत परिषद से जुड़े विद्वान पंडित विनय पाण्डेय ने लोकल 18 से बातचीत में स्पष्ट कहा कि महाश्मशान में खेले जाने वाली मसाने की होली शास्त्र सम्मत परंपरा नहीं है. उनका कहना है कि बीते कुछ वर्षों से शुरू हुई इस परंपरा को अब प्राचीन बताकर प्रचारित किया जा रहा है, जबकि इसके धार्मिक आधार पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं.
वाराणसी. काशी के महाश्मशान घाट पर चिता भस्म की होली मनाई जाती है. जलती चिताओं के बीच होने वाले इस अद्भुत होली पर अब विवाद खड़ा हो गया है. विद्वानों के सबसे बड़े संगठन काशी विद्वत परिषद ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है. काशी विद्वत परिषद ने इसे अशास्त्रीय बताया है. जल्द ही विद्वत परिषद इस पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को पत्र भी भेजेगी.
बीएचयू के ज्योतिष डिपार्टमेंट के हेड और विद्वत परिषद से जुड़े विद्वान पंडित विनय पांडेय ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि महाश्मशान में मसाने की होली शास्त्र संवत नहीं है. बीते कुछ सालों से यह दौर चल रहा है, जिसे अब आयोजक प्राचीन परंपरा बता रहे हैं. उन्होंने बताता की महाश्मशान की एक मर्यादा है. यह जगह उत्सव मनाने की जगह नहीं है. वो भी इस प्रकार का उत्सव जिसमें युवक, युवतियां और अन्य लोग परम्परा के नाम पर काशी के मर्यादा को तार-तार करतें है.
श्मशान भगवान शिव का स्थान
श्मशान भगवान शिव का एक स्थान है. वहां भगवान शिव नृत्य करते है. ऐसे में उस जगह पर होली खेलकर उत्सव मनाना पूरी तरह से गलत है. क्योंकि किसी भी मनुष्य में भगवान शिव के समान सामर्थ्य नहीं है. इसलिए ऐसे अशास्त्रीय परम्परा वाली होली का काशी विद्वत परिषद विरोध करती है. उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही विद्वानों की बैठक कर इस संबंध में एक पत्र भी जारी किया जाएगा और उसे प्रशासन को सौंप इस पर रोक लगाने की बात मांग उठाई जाएगी.
दो दिन होती है मसाने की होली
बताते चलें कि रंगभरी एकादशी और उसके अगले दिन महाश्मशान हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली खेली जाती है. इस होली में भगवान शिव के गढ़ और औगढ़ शामिल होतें है. हालांकि, बदलते दौर में इस होली में बड़ी संख्या में युवक युवतियां भी शामिल होती है. धार्मिक मान्यता है कि इस मसाने की होली में भगवान शिव खुद अदृश्य रूप में अपने गढ़ों के साथ होली खेलने यहां आते है. आयोजकों का दावा है कि काशी में मसाने की होली की परम्परा पुरानी है हालांकि काशी विद्वत परिषद इसका मुखर विरोध अब कर रही है.
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