चिता की राख से तैयार होता है भस्म, जानिए कैसे मनाई जाती है मसाने की होली
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मसाने होली 2026: वाराणसी में अघोरी संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिलती है, खासकर मसाने की होली के दौरान. गले में नरमुंड की माला और हाथों में कपाल लिए अघोरी श्मशान में होली खेलते हैं. रंगभरी एकादशी के अगले दिन, यानी फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मणिकर्णिका घाट पर इसका भव्य आयोजन किया जाता है, जिसे देखने देश-विदेश से लोग उत्सुक रहते हैं.
वाराणसी. मसाने की होली पर भारी हंगामा मचा है. इस हंगामे के बीच जोर-शोर से इसकी तैयारियां भी जारी है. इस बार महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर होने वाले इस उत्सव में करीब 50 क्विंटल भस्म से होली खेली जाएगी. इस भस्म को महाश्मशान घाट पर जलने वाली चिता के बचे हुए राख से तैयार किया जाता है. आयोजकों ने इस बार अब तक करीब 40 बोरे से ज्यादा भस्म को इक्कठा किया गया है.
आयोजक गुलशन कपूर ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात जिसे अघोर चतुर्दशी या अघोर अमावस्या कहतें है. इस दिन से ही चिता के बचे राख को इक्कठा कर उसे छानकर भस्म तैयार किया जाता है. करीब 6 महीने तक हजारों चिताओं की राख से तैयार इस भस्म से मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली होती है. इस होली में अघोरी और तांत्रिक शामिल होते है. इसके अलावा बड़ी संख्या में युवक और युवतियां भी यहां इसे देखने आतें है.
पहले से भव्य होगा आयोजन
गले में नरमुंड की माला और हाथों में कपाल लिए अघोरी महाश्मशान में होली खेलते हैं. रंगभरी एकादशी के अगले दिन, यानी फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मणिकर्णिका घाट पर इसका आयोजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस होली में भगवान शिव स्वयं अदृश्य रूप में शामिल होते हैं और अपने गणों के साथ श्मशान में होली खेलते हैं. आयोजकों का दावा है कि इस बार का आयोजन पहले से भी अधिक भव्य और आकर्षक होगा.
बिना आमंत्रण के आतें है भक्त
गुलशन कपूर ने बताया कि इस आयोजन में भक्त बिना किसी आमंत्रण के शामिल होते है. मसाने की होली की शुरुआत श्मशान नाथ बाबा को भस्म और गुलाल अर्पित किया जाता है. उसके बाद भगवान शिव के गढ़ आपस में चिता की राख से होली खेलतें है. सिर्फ और सिर्फ काशी में ही ऐसा अद्भुत और अलौंकिक नजारा देखने को मिलता है.
एक दिन पहले हरिश्चंद्र घाट पर होती है होली
फाल्गुल शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली होती है. हालांकि इसके एक दिन पहले यानी आमलकी एकादशी पर हरिश्चंद्र घाट पर भी चिता भस्म की होली का आयोजन होता है. इस दिन बारात और शोभायात्रा भी निकाली जाती है. अघोरपीठ बाबा कीनाराम से यह झांकी निकलती है. जिसमें विभिन्न शिव के स्वरूप नजर आतें है.
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