यूपी का शिव मंदिर जहां जमीन फोड़कर प्रकट हुई शिवलिंग, इसलिए नाम पड़ा भुईफोरवानाथ शिव मंदिर
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लखीमपुर के महिला मैदान में स्थित भुईफोरवानाथ शिव मंदिर स्थानीय आस्था का प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर अपने स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जो भूमि से स्वयं प्रकट हुआ था. सावन महीने में दूर-दूर से भक्त जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए आते हैं. मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है और कुछ कथाओं के अनुसार इसका संबंध रामायण या महाभारत काल से हो सकता है.
लखीमपुर. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर शहर की महिला मैदान में स्थित भुईफोरवानाथ शिव मंदिर शहर के आसपास के क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर अपनी धार्मिक महत्व और अनोखी मान्यताओं के लिए काफी प्रसिद्ध है काफी दूर-दूर से शिव भक्त यहां भगवान शिव की आराधना करने के लिए आते हैं. जिले का एक अनोखा मंदिर है जहां शिवलिंग भूमि को फोड़कर स्वयं प्रकट हुई थी, जिसे स्वयंभू शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है. इसीलिए इस मंदिर का नाम भुईफोरवानाथ पड़ा. सावन के महीने में काफी दूर-दूर से शिव भक्त जलाभिषेक करने के लिए आते हैं. भुईफोरवनाथ शिव मंदिर की स्थापना को लेकर किसी के पास कोई सटीक जानकारी नहीं है लेकिन स्थानीय मानता हूं और कथाओं के अनुसार यह मंदिर सैकड़ो वर्ष पुराना है. वहीं कुछ लोग कहना है कि यह मंदिर रामायण या महाभारत कालीन से संबंधित हो सकता है.
शिवलिंग को लेकर स्वयं प्रकट होने का यह विश्वास
मंदिर के शिवलिंग को लेकर यह विश्वास है कि यह स्वयं प्रकट हुआ, जिसके कारण इसे विशेष रूप से चमत्कारी माना जाता है. भुईफोरवानाथ मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, सावन के महीने में खासकर प्रत्येक सोमवार को मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ता है. इस दौरान जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से कांवड़िये भी शामिल होते हैं. मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव के साथ माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियां भी स्थापित हैं. लोकल 18 से बातचीत करते हुए महंत अमित गोस्वामी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है. यह शिवलिंग खुदाई के दौरान निकली थी. महाशिवरात्रि के दिन पगड़ी रस्म बड़े धूमधाम से मनाई जाती है. अमित गोस्वामी के कहना है जिन लोगों की शादी नहीं होती है वह लोग यहां आते हैं और पगड़ी रस्म पर अपनी मनोकामना मांगते हैं मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद पगड़ी चढ़ाई जाती है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें