शाहजहांपुर में जिसने किसानों का करोड़ों दबाया, उसी को गेहूं खरीदा का जिम्मा
शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के अन्नदाताओं के साथ व्यवस्था का क्रूर मजाक सामने आया है. बीते साल नवंबर और दिसंबर में अपनी खून-पसीने से तैयार धान की फसल सरकारी केंद्रों पर बेचने वाले सैकड़ों किसान आज भी अपने भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं. एक तरफ गेहूं की फसल पककर तैयार है और कटाई के लिए पैसों की सख्त दरकार है, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सहकारी संघ (UPSS) जैसी लापरवाह एजेंसी किसानों का करोड़ों रुपये दबाए बैठी है. सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि भुगतान में विफल रहने के बावजूद, प्रशासन ने आगामी गेहूं खरीद के लिए इसी दागी एजेंसी को फिर से 25 क्रय केंद्र आवंटित कर दिए हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है.
स्वीकारा भी
एडीएम प्रशासन रजनीश कुमार मिश्रा ने भी स्वीकार किया कि UPSS की ओर से की गई धान खरीद का पूरा भुगतान अभी तक किसानों को नहीं हो पाया है. उन्होंने बताया कि UPSS ने जिले के लगभग 7,033 किसानों से 61,202 मीट्रिक टन धान की खरीद की थी, जिसमें से ज्यादातर किसानों का भुगतान किया जा चुका है. हालांकि, अब भी 299 किसानों का लगभग 6 करोड़ 47 लाख रुपये का भुगतान बकाया है. एडीएम का कहना है कि एजेंसी को बजट देरी से मिला लेकिन उन्हें कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द बकाया भुगतान किसानों के खातों में भेजें.
पैसा होकर भी कर्ज
शाहजहांपुर के किसानों ने इस उम्मीद में धान सरकारी केंद्रों पर बेचा था कि समय पर पैसा मिलेगा, जिससे वे अगली फसल की तैयारी कर सकेंगे. लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी UPSS ने भुगतान नहीं किया है. अब गेहूं की फसल खेतों में सुनहरी होकर कटाई के लिए तैयार खड़ी है. किसानों को कंबाइन मशीन और मजदूरी के लिए नकदी की सख्त जरूरत है, लेकिन पैसा न मिलने से वे साहूकारों के कर्ज तले दबने को मजबूर हैं.
जख्मों पर नमक
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जिस एजेंसी (UPSS) ने धान खरीद में किसानों को रुलाया और करोड़ों का भुगतान रोका, उसे दंडित करने के बजाय शासन ने गेहूं खरीद के लिए 25 नए क्रय केंद्र सौंप दिए हैं. यह निर्णय किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. किसान सवाल पूछ रह हैं कि जो एजेंसी पिछले सत्र का बकाया नहीं चुका पा रही, वह नए सीजन में समय पर भुगतान कैसे सुनिश्चित करेगी?
ढुलमुल रवैया घातक
सरकार का दावा है कि किसानों को फसल बेचने के 72 घंटों के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. शाहजहांपुर में 299 किसान ऐसे हैं जो दिसंबर से अपने हक के साढ़े छह करोड़ रुपये का इंतजार कर रहे हैं. एजेंसी की लापरवाही और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये ने किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है. यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो गेहूं की आवक के समय यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है.