खेतों में करनी है दोगुनी पैदावार, तो गांठ बांध लें कृषि एक्सपर्ट की ये तीन बात
कानपुर: कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. महक सिंह ने किसानों के लिए खेती को आसान और लाभदायक बनाने के कुछ बेहद जरूरी और वैज्ञानिक तरीके बताए हैं. उनका कहना है कि खेती में बड़ी तकनीक से ज्यादा जरूरी छोटे-छोटे सही कदम होते हैं, जिन्हें अपनाकर किसान अपनी पैदावार को काफी बढ़ा सकते हैं और फसल को बीमारियों व कीटों से भी बचा सकते हैं.
लाइन में बुवाई और सही दूरी
डॉ. महक सिंह के अनुसार, ज्यादातर किसान बुवाई के समय इस बात पर ध्यान नहीं देते कि पौधे किस तरह लगाए जा रहे हैं, लेकिन यही सबसे अहम स्टेप है. अगर किसान एक सीधी लाइन में बुवाई करते हैं, तो हर पौधे को बराबर धूप, पानी और पोषक तत्व मिलते हैं. इससे पौधे मजबूत होते हैं और उनकी ग्रोथ एक समान होती है. उन्होंने बताया कि हर फसल के लिए पौधों के बीच सही दूरी रखना बेहद जरूरी है.
उदाहरण के तौर पर गेहूं में लगभग 20-22 सेंटीमीटर, धान में 15-20 सेंटीमीटर और सब्जियों में 30 से 60 सेंटीमीटर तक दूरी रखनी चाहिए. अगर पौधे बहुत पास-पास लगाए जाते हैं, तो उनमें हवा का सही प्रवाह नहीं हो पाता, जिससे फंगल रोग और कीटों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. वहीं सही दूरी रखने से पौधों को फैलने की जगह मिलती है और उत्पादन भी बेहतर होता है.
संतुलित खाद, सही सिंचाई और अच्छा बीज
डॉ. सिंह ने बताया कि किसान अक्सर ज्यादा उत्पादन के चक्कर में जरूरत से ज्यादा खाद डाल देते हैं, जबकि यह तरीका गलत है. उन्होंने सलाह दी कि पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिए और उसी के आधार पर खाद का उपयोग करना चाहिए. संतुलित मात्रा में उर्वरक देने से फसल को सही पोषण मिलता है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है.सिंचाई के बारे में उन्होंने कहा कि “न ज्यादा पानी, न कम फसल की जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें.” जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ें खराब हो सकती हैं और कम पानी देने से पौधे कमजोर रह जाते हैं. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को प्रमाणित और रोगमुक्त बीज का इस्तेमाल करने की सलाह दी. उनका कहना है कि अगर शुरुआत अच्छी होगी, तो फसल का रिजल्ट भी अच्छा ही मिलेगा. बीज की गुणवत्ता सीधे उत्पादन पर असर डालती है.
कीट और बीमारियों से बचाव
डॉ. महक सिंह ने किसानों को यह भी बताया कि खेत की नियमित निगरानी बहुत जरूरी है. अगर समय रहते कीट या बीमारी के लक्षण दिख जाएं, तो उन्हें शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है.उन्होंने जैविक उपायों को अपनाने पर जोर दिया. जैसे नीम आधारित कीटनाशकों का उपयोग, फसल चक्र अपनाना और खेत की साफ-सफाई बनाए रखना. इससे न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि खेती की लागत भी कम होती है.
सही दूरी, संतुलित खाद और समय पर देखभाल
डॉ. सिंह का कहना है कि अगर किसान लाइन में बुवाई, सही दूरी, संतुलित खाद और समय पर देखभाल जैसे आसान नियमों को अपनाएं, तो उनकी पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है. वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती ही आज के समय में किसानों के लिए सबसे बड़ा सहारा बन सकती है. कानपुर के किसानों के लिए ये सुझाव न सिर्फ उत्पादन बढ़ाने का जरिया हैं, बल्कि उनकी आय को भी नई ऊंचाई दे सकते हैं.