हिल जाएगा सपा का ‘यादव किला’, भाजपा ने बहुत पहले चल दी थी चाल, बिहार में तेजस्वी भी आए टेंशन में

0
हिल जाएगा सपा का ‘यादव किला’, भाजपा ने बहुत पहले चल दी थी चाल, बिहार में तेजस्वी भी आए टेंशन में


Last Updated:

उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछले दो उपचुनावों से नई इबारत लिखी जा रही है. पहला यह की सूबे के यादव वोटरों को अपनी जागिर मानने वाले अखिलेश यादव, यादव बाहुल्य इलाके में चुनाव हार रहे है और दूसरा यह की मुस्लिम बाहु…और पढ़ें

भाजपा और सीएम योगी बने अखिलेश यादव की परेशानी.

हाइलाइट्स

  • उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछले दो उपचुनावों से नई इबारत लिखी जा रही है.
  • यूपी में सपा को यादव और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में हार का सामना.
  • बिहार में भी भाजपा की रणनीति से तेजस्वी यादव चिंतित.

अयोध्या: उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछले दो उपचुनावों से नई इबारत लिखी जा रही है. पहला यह की सूबे के यादव वोटरों को अपनी जागिर मानने वाले अखिलेश यादव, यादव बाहुल्य इलाके में चुनाव हार रहे है और दूसरा यह की मुस्लिम बाहुल्य इलाके में भी समाजवादी पार्टी को हार का सामना करना पड़ रहा है. इन नई कहानियों के सूत्रधार हैं भारतीय जनता पार्टी की रणनीति. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ऊपर बार-बार यादवों और मुसलमानों की अनदेखी के आरोप लगाते रहे हैं. लेकिन भाजपा पिछले कुछ समय से अपने मास्टर स्ट्रोक के जरिए इन आरोपों को गलत साबित कर रही है. भारतीय जनता पार्टी का पहला मास्टर स्ट्रोक रहा मध्य प्रदेश में यादव बिरादरी से मुख्यमंत्री का चयन करना. दरअसल हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की. इस फैसले को भारतीय जनता पार्टी ने खूब भुनाया है. फिर चाहे वो उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो या फिर हरियाणा. भाजपा के इस फैसले का असर यूपी के कई सीटों पर हुए उपचुनाव में देखने को मिला है. चाहे वो मिल्कीपुर हो या फिर करहल. करहल में भले ही भाजपा की हार हुई, लेकिन वोट प्रतिशत काफी बेहतर रहा.

योगी सरकार की खराब छवि बनाने में फुस्स हुए अखिलेश
मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी की जीत ने ये तय कर दिया है कि योगी आदित्यनाथ ना केवल एक बेहतर मुख्यमंत्री हैं बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी हैं. समाजवादी पार्टी को जितने वोट मिले, उतने ही वोटों से भाजपा जीत गई. मतलब मुकाबला एकतरफा रहा. समाजवादी पार्टी की सारी नीति और रणनीति ध्वस्त हो गई. अखिलेश यादव का प्रचार और उनका सांसद पत्नी डिंपल यादव का रोड शो भी काम नहीं आया. इसके मुकाबले में भाजपा का हर दांव हिट रहा. पार्टी का हिंदुत्व कार्ड भी चला और सामाजिक समीकरण भी काम आया. महाकुंभ में भगदड़ के बहाने योगी सरकार की सनातन विरोधी छवि बनाने की अखिलेश की कोशिश भी फुस्स हो गई.

शायद सांसद का रोना पड़ा भारी
अगर कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो अयोध्या में दलित महिला महिला के साथ हुई घटना ने कुछ हदतक चुनाव में प्रभाव डाला. 22 वर्षीय महिला की नृशंस हत्या की ‘नैतिक जिम्मेदारी’ स्वीकार करते कैमरे पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद कैद हुए थे. उन्होंने भगवा पार्टी ने निशाना साधा था. घटना पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद रो पड़े थे. फैजाबाद के सांसद ने कहा था, मुझे दिल्ली जाने दो. मैं इस मामले को लोकसभा में (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी के समक्ष उठाऊंगा. सांसद जिस ढंग से रोए, वह वोटरों को शायद पसंद नहीं आया. लोग कह रहे थे- सांसद के रोने में फीलिंग नहीं थी.

भाजपा की मिल्कीपुर में जीत
गौरतलब है, अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की है. भाजपा उम्मीदवार चंद्रभानु पासवान यहां 61,710 वोट से जीतने में सफल हुए. भाजपा प्रत्याशी चंद्रभानु पासवान को 60.17 फीसदी वोट प्राप्त हुए. हालांकि दूसरी ओर, सपा प्रत्याशी अजीत प्रसाद को केवल 34 फीसदी के करीब वोट मिले.

लालू के खेमे पर भी भाजपा की नजर
जैसा कि सभी को पता ही है कि बिहार में यादवों का कुनबा हमेशा लालू प्रसाद के साथ रहा है. हालांकि, अब सियासी गलियारे में एक अलग समीकरण देखने को मिल सकता है. बिहार में लालू प्रसाद के खेमे में भी भारतीय जनता पार्टी सेंधमारी कर सकती है. इसका बड़ा कारण एक यादव चेहरे को सीएम बनाना है. मोहन यादव को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने कहीं न कहीं एक बड़ी चाल चल दी है. वहीं, तेजस्वी यादव भी चिंता में दिख रहे हैं. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली वाला फॉर्मूला बिहार में काम नहीं आएगा, यह बिहार है और बिहार को समझना इतना आसान नहीं है.

नहीं रुकेगी अखिलेश यादव की दौड़ती हुई साइकिल?
अब अखिलेश यादव के सामने यादवों को एकजुट रखना चुनौती बन गया है. ऐसा लग रहा है कि मिल्कीपुर की हार का असर बिहार में भी पड़ सकता है. इसके बाद भी सपा 2027 के लिए अपनी चुनावी रणनीति बदलने को मुड़ में नजर नहीं आ रही है. इसके संकेत खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दिए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘पीडीए की बढ़ती शक्ति का सामना भाजपा वोट के बल पर नहीं कर सकती है, इसलिए वो चुनावी तंत्र का दुरुपयोग करके जीतने की कोशिश करती है.’

अखिलेश यादव ने दिए ये संकेत
सपा प्रमुख ने आगे के लिए अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा, ‘पीडीए मतलब 90 फीसदी जनता ने खुद अपनी आंखों से ये धांधली देखी है. ये झूठी जीत है, जिसका जश्न भाजपाई कभी भी आईने में अपनी आंखों-में-आंखें डालकर नहीं मना पाएंगे. लोकसभा चुनावों में अयोध्या में हुई पीडीए की सच्ची जीत, उनके मिल्कीपुर के विधानसभा की झूठी जीत पर कई गुना भारी है और हमेशा रहेगी.’

homeuttar-pradesh

हिल जाएगा सपा का ‘यादव किला’, BJP ने बहुत पहले चल दी थी ये चाल



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हो सकता है आप चूक गए हों