आजमगढ़ के फेमस ऐतिहासिक स्थान, यहां आज भी जिंदा हैं मुगल-ब्रिटिश काल के निशान

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आजमगढ़ के फेमस ऐतिहासिक स्थान, यहां आज भी जिंदा हैं मुगल-ब्रिटिश काल के निशान


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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से आजमगढ़ यूपी के एक महत्वपूर्ण जिलों में से एक है, यहां पर मुगल काल से लेकर अंग्रेजों के जमाने तक के कई ऐतिहासिक इमारतें आज भी मौजूद हैं. जो अपने पुराने इतिहास और तत्कालीन समय में आजमगढ़ के महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति को दर्शाती हैं.

आजमगढ़ जनपद ऐतिहासिक रूप से प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों में से एक माना जाता है. यहां पौराणिक इतिहास से लेकर मुगलकालीन इमारतों और अंग्रेजों के जमाने में बनी कई धरोहरें आज भी मौजूद हैं, जो जिले के इतिहास और उस समय की भौगोलिक स्थिति को दर्शाती हैं.

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जनपद में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान उपयोग में लाई जाने वाली कई इमारतें आज भी मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल उस समय मुख्य रूप से प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता था. इसके अलावा जिले में मुगलकालीन इतिहास से जुड़ी कई इमारतें भी हैं. आइए जानते हैं उन पुरानी इमारतों के बारे में, जो आज भी आजमगढ़ की धरोहर के रूप में जानी जाती हैं.

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आजमगढ़ जिले में कुंवर सिंह उद्यान, जिसे पहले कंपनी बाग के नाम से जाना जाता था, नगर पालिका क्षेत्र में स्थित है. इतिहास की दृष्टि से यह जिले का एक प्रमुख केंद्र है. यह स्थान देश की आजादी के संघर्ष से जुड़ा हुआ है. 1857 की क्रांति के दौरान जिले के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के कंपनी बाग पर हमला कर इसे अपने कब्जे में ले लिया था. तभी से इस स्थान को वीर कुंवर सिंह उद्यान के नाम से जाना जाता है.

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आजमगढ़ के हरबंशपुर स्थित तमसा नदी पर बना शाही पुल लगभग 500 वर्ष पुराना है, जो जिले के इतिहास का जीवंत प्रमाण है. इस पुल का निर्माण शेरशाह सूरी ने जौनपुर की यात्रा के दौरान मात्र दो दिनों में कराया था. यह पुल आज भी जिले की प्रमुख धरोहरों में गिना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में सीमेंट या आधुनिक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि उस समय प्रचलित पारंपरिक मसालों का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण यह आज भी मजबूती से खड़ा है.

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शहर के कर्बला मैदान में स्थित मकबरा आजमगढ़ के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यहां जिले के संस्थापक माने जाने वाले राजा आजम शाह, उनकी बेगम और उनके कई परिजनों की कब्रें मौजूद हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, राजा के कई सिपाहियों को भी यहीं दफनाया गया था. यह क्षेत्र 17वीं और 18वीं शताब्दी में बने मकबरों और कब्रों से भरा हुआ है.

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आजमगढ़ के नगर पालिका क्षेत्र में एक और पुरानी इमारत है, जिसका निर्माण अंग्रेजों के समय में हुआ था. यह इमारत आज भी जिले की ऐतिहासिक धरोहरों में गिनी जाती है. समय के साथ यह पुरानी जरूर हो गई है, लेकिन आज भी इसका उपयोग किया जा रहा है. इस भवन में वर्तमान में सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल संचालित हो रहा है.

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इसके अलावा, आजमगढ़ के पुलिस लाइन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक इमारत स्थित है, जिसका निर्माण आजादी से पहले वर्ष 1935 में हुआ था. यह इमारत जेटली पुलिस रेस्ट हाउस के नाम से जानी जाती है. बताया जाता है कि उस समय इसका उपयोग अंग्रेजी पुलिस द्वारा किया जाता था, जिसे अब आजमगढ़ पुलिस द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है.



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