मिर्जापुर का अनोखा नक्काशीदार कुआं, महल जैसी बनावट, आज भी कायम है ऐतिहासिक पहचान

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मिर्जापुर का अनोखा नक्काशीदार कुआं, महल जैसी बनावट, आज भी कायम है ऐतिहासिक पहचान


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The Historic Well of Mirzapur: मिर्जापुर के शहर कोतवाली के पीछे पक्की सराय में 1850 ई. में कुएं का निर्माण कराया गया. कुएं का निर्माण करने के बाद इसमें बलुआ लाल पत्थरों का प्रयोग किया गया. बलुआ लाल पत्थरों से कुएं की नक्कासी की गई. इतिहासकार प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि कुंआ बनाने का उद्देश्य व्यवसाइयों को ठहरने के लिए किया गया था. पीतल के कारोबारी यहां पर आते थे. शीतल पेयजल लेते थे. यहीं पर आराम करते थे.

मिर्जापुर: अभी तक आपने महलों को नक्काशीदार पत्थरों से बना हुआ देखा होगा. हालांकि, यूपी के मिर्जापुर जिले में कुएं को नक्कासीदार पत्थरों से बनाया गया है. बाहर से देखने पर यह महल के जैसा नजर आता है. कुएं का निर्माण व्यवसायिक दृष्टिकोण से किया गया था. पीतल के बर्तन के कारोबारी मिर्जापुर आते थे. उनके पेयजल के साथ ही रुकने के लिए महल जैसा कुंआ बनाया गया था. आज भी यह ऐतिहासिक स्थलों में एक है. कुएं में आज भी पानी है. नगर पालिका के द्वारा कुएं को संरक्षित करने के लिए काम किया गया है, जहां कुएं के चारों तरफ सुरक्षा घेरा के तौर पर स्टील की रेलिंग लगा दी गई है.

मिर्जापुर के शहर कोतवाली के पीछे पक्की सराय में 1850 ई. में कुएं का निर्माण कराया गया. कुएं का निर्माण करने के बाद इसमें बलुआ लाल पत्थरों का प्रयोग किया गया. बलुआ लाल पत्थरों से कुएं की नक्कासी की गई. इतिहासकार प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि कुंआ बनाने का उद्देश्य व्यवसाइयों को ठहरने के लिए किया गया था. पीतल के कारोबारी यहां पर आते थे. शीतल पेयजल लेते थे. यहीं पर आराम करते थे. यह कुआं व्यवसायिक उपयोगिता के लिए ही बनाया गया था. आज भी यह कुआं ऐतिहासिक धरोहरों में एक है.

संरक्षित करने की है जरूरत
स्थानीय निवासी विनोद कुमार ने बताया कि कुएं की उपयोगिता पहले से ही थी. यहां के पानी का उपयोग शहर के लोग करते थे. हालांकि, बदलते समय के साथ जरूरतें खत्म हुई. कुआं आज भी वैसे ही है. सुरेश चंद्र ने बताया कि यह कुआं 200 सालों से जान रहे हैं. मेरे पिताजी 104 वर्ष के थे. मैं 70 साल का हूं. हालांकि, तबसे अबतक कुआं ऐसे ही है. यह बेहद ही खूबसूरत बनाया गया है. व्यवसाइयों के ठहरने के लिए लिहाज से कुएं का निर्माण हुआ था. नगर पालिका ने जीर्णोद्धार कराया गया है. यह ऐतिहासिक स्थलों में एक है. इसे संरक्षित करने की विशेष जरूरत है.

1854 में बना था कुआं
मुन्नालाल ने बताया कि यह काफी पुराना कुआं है. परिवार के लोगों ने बताया है कि 1854 के आस-पास कुएं का निर्माण कराया गया था. इसके पानी का उपयोग सबसे ज्यादा मोहल्ले में करते थे. दोपहर में व्यवसाई आराम करने के लिए उपयोग करते थे. सरकार और प्रशासन से अपील करेंगे कि हेरिटेज के तौर पर कुएं को संरक्षित किया जाए. ताकि, इसकी दिव्यता व भव्यता बनी रहे.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें



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