जहां बीता गौतम बुद्ध का बचपन… महराजगंज की इस जगह में छुपा है बौद्धकाल का पुराना इतिहास

0
जहां बीता गौतम बुद्ध का बचपन… महराजगंज की इस जगह में छुपा है बौद्धकाल का पुराना इतिहास


Last Updated:

Buddhist Heritage Maharajganj: महराजगंज जिले का ‘बनरसिया कला’ क्षेत्र बौद्धकालीन इतिहास का वो सुनहरा पन्ना है, जिसे अब दुनिया के सामने लाने की तैयारी चल रही है. मां के निधन के बाद बुद्ध का बचपन जिस ‘देवदह’ की गलियों और पुष्करणी तालाब के किनारे बीता, उसे अब एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में संवारा जा रहा है. जैसे ही इस जगह और चौक क्षेत्र के ‘रामग्राम’ स्तूप की पहचान पर मुहर लगेगी, महराजगंज का नाम दुनिया के नक्शे पर चमकने लगेगा. आइए जानते हैं महराजगंज के इस ऐतिहासिक खजाने और यहां छिपी बुद्ध की यादों की पूरी कहानी.

महराजगंज: उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला अपनी खूबसूरती के साथ-साथ इतिहास के कई गहरे राज भी अपने अंदर समेटे हुए है. जिले के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनकी अपनी खास अहमियत है. इन्हीं में से एक है लक्ष्मीपुर क्षेत्र का ‘बनरसिया कला’. यह जगह बौद्ध काल के इतिहास से जुड़ी हुई है और इसे भगवान गौतम बुद्ध का ननिहाल माना जाता है.

महराजगंज के जाने-माने लेखक डॉ. परशुराम गुप्त बताते हैं कि जब लुंबिनी में भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, तो उसके सात दिन के भीतर ही उनकी माता का देहांत हो गया था. इसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया. गौतम बुद्ध के बचपन का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी देवदह में बीता. कहा जाता है कि बड़े होने पर भी जब वे अपने ननिहाल आते थे, तो यहां मौजूद ‘पुष्करणी’ तालाब के किनारे टहलना उन्हें बहुत पसंद था.

ऐतिहासिक पुष्करणी तालाब का हो रहा कायाकल्प
गौतम बुद्ध की यादों से जुड़ा वह ऐतिहासिक पुष्करणी तालाब आज भी वहां मौजूद है. खुशी की बात यह है कि वर्तमान में इस तालाब को सुधारने और सुंदर बनाने का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है. इसे संवारने का मकसद इस पूरे क्षेत्र को एक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि दुनिया भर से आने वाले लोग बुद्ध के बचपन की यादों को करीब से महसूस कर सकें.

यह भी पढ़ें: इस वीकेंड घूमने का प्लान? जानें महराजगंज के 5 मज़ेदार टूरिस्ट स्पॉट, बजट फ्रेंडली और मज़ेदार

‘रामग्राम’ और ‘देवदह’ से बदलेगी महराजगंज की तस्वीर

जिले के चौक क्षेत्र में स्थित ‘रामग्राम’ को लेकर भी काफी चर्चा है. माना जाता है कि यहां भगवान बुद्ध का एक महत्वपूर्ण स्तूप है, जो एक तरह से उनकी समाधि के रूप में है. पिछले दो हजार सालों से इसकी जानकारी दुनिया से छिपी हुई थी, इसलिए अब इसे उजागर करना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है. डॉ. परशुराम गुप्त के अनुसार, जैसे ही देवदह और रामग्राम के इतिहास की पूरी तरह पुष्टि हो जाएगी, इन्हें ‘बौद्ध परिपथ योजना’ (Buddhist Circuit) से जोड़ दिया जाएगा.

पर्यटन से खुलेगा तरक्की का रास्ता
जब ये दोनों स्थल अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन के नक्शे पर आएंगे, तो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया से पर्यटकों का यहां आना शुरू होगा. इससे महराजगंज की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत होगी. पर्यटकों के आने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, होटल और छोटे व्यवसाय बढ़ेंगे और पूरे जिले की तस्वीर बदल जाएगी.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *