काशी का दूसरा स्वर्ण मंदिर कहलाता है संत रविदास मंदिर, जानिए इसका इतिहास
Last Updated:
Varanasi Ravidas Temple: धर्म नगरी काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है. इस शहर में कई मंदिर हैं. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख श्री काशी विश्वनाथ का मंदिर भी इसी काशी में है. इसे काशी के स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन काशी में बाबा विश्वनाथ के अलावा दूसरा स्वर्ण मंदिर भी है जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं.
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से सटे सिरगोवर्धन इलाके में संत रविदास का मंदिर है. इस मंदिर को काशी का दूसरा स्वर्ण मंदिर कहा जाता है, क्योंकि इस मंदिर के शिखर से लेकर प्रवेश द्वार तक सोना जड़ा है. एक आंकड़ें के मुताबिक, काशी के रविदास मन्दिर के पास करीब 300 किलो सोना है.

खास बात यह है कि ये सोना संत रविदास के भक्तों ने ही उन्हें दान में दिया है. इस मंदिर का शिखर स्वर्ण मंडित है. बिल्कुल वैसा जैसा काशी विश्वनाथ के शिखर पर सोना जड़ा हुआ है. शिखर के अलावा मंदिर पर 32 स्वर्ण कलश भी स्थापित है. मंदिर पर स्थापित पहला स्वर्ण कलश 1994 में संत गरीब दास के संगत के सहयोग से लगाया गया था.

इसके अलावा संत रविदास का छत्र भी सोने से बना हुआ है.एक भक्त ने सोने के इस छत्र को दान में दिया था. इस छत्र का वजन भी करीब 35 किलों का है. इसके अलावा संत रविदास के पास सोने की पालकी भी है. हालांकि, यह पालकी विशेष दिनों में देखने को मिलती है. यह पालकी करीब 130 किलो सोने से बनी हुई है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

संत रविदास के इस मन्दिर का निर्माण साल 1965 में हुआ था. 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इसका अनावरण किया था. उस समय उन्होंने मंदिर में कई काम कराएं थे. यह स्थान रैदासियों के लिए सबके बड़ा आस्था का केंद्र है. वैसे तो हर दिन यहां रैदासी आते है, लेकिन संत रविदास के जयंती पर यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है.

संत रविदास के जयंती के अवसर पर इस जगह पर मिनी पंजाब की झलक दिखाइ देती है. पंजाब के अलावा विदेशों से भी रैदासी यहां आते हैं और यहां मत्था टेकते हैं. एक हफ्ते तक यह जगह रैदासियों से भरा रहता है.

काशी के इस स्वर्ण मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मत्था टेक चुके हैं. इसके अलावा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली के सीएम रहे अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित कई मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री यहां आ चुके हैं.

इस मंदिर के मुख्य द्वार पर भी सोना जड़ा गया है. मंदिर का दरवाजा भी स्वर्ण मंडित है. बीते कुछ साल पहले ही एक भक्त के दान में दिए सोने से मंदिर ट्रस्ट ने इस काम को पूरा करवाया था. हालांकि, यहां सरकार ने भी विकास के कई काम कराएं हैं जिससे यह स्थान याबी पर्यटन का नया केंद्र बनता जा रहा है.

स्वर्ण शिखर और स्वर्ण कलश के अलावा संत रविदास के मंदिर में 35 किलो सोने से बना दीपक भी है. इस विशाल दीपक में एक बार में 5 किलो घी भरा जाता है. इस दीपक में यदि एक बार घी भरा जाए तो 7 दिनों तक यह अनवरत जलता रहता है. मुख्य मंदिर में ही यह दीपक स्थापित है.