परिवार चलाना मुश्किल था..5वीं पास देवीदीन कैसे बने दूसरे किसानों के लिए उम्मीद

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परिवार चलाना मुश्किल था..5वीं पास देवीदीन कैसे बने दूसरे किसानों के लिए उम्मीद


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परिवार चलाना मुश्किल था..5वीं पास देवीदीन कैसे बने दूसरे किसानों के लिए उम्मीद

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Vegetable Farming : देवीदीन पहले दूसरे किसानों की तरह पारंपरिक तरीके से गेहूं और धान की खेती करते थे, लेकिन लगातार लागत बढ़ रही थी और आमदनी कम होने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था. इन्हीं हालातों में उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला लिया. हालांकि नई फसल, नई तकनीक और अलग तरीके की देखभाल की जरूरत थी. शुरुआत के दिनों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

गोंडा. प्रगतिशील किसानों के लिए खेती हमेशा से मुनाफे का सौदा रही है. उत्तर प्रदेश के गोंडा स्थित विकासखंड रुपईडीह के किसान देवीदीन उन्हीं में से एक हैं. उन्होंने अपनी मेहनत और नई सोच के दम पर नई मिसाल पेश की है. पहले वह दूसरे किसानों की तरह पारंपरिक तरीके से गेहूं और धान की खेती करते थे, लेकिन लगातार लागत बढ़ रही थी और आमदनी कम होने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था. ऐसे में उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला लिया और सब्जियों की खेती की ओर कदम बढ़ाया. लोकल 18 से किसान देवीदीन बताते हैं कि हमने केवल पांचवी तक की पढ़ाई की है. घर की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी. दूसरे शहरों में जाकर काम कर रहे थे, फिर घर वापस आकर किसानी करना शुरू किया. लगभग 2 साल पहले हमने सब्जी उगाना शुरू किया. इस समय लगभग 3 बीघा में सब्जी की खेती कर रहे हैं.

कैसे शुरू हुआ सफर

किसान देवीदीन बताते हैं कि शुरुआत में सब्जी की खेती करना उनके लिए आसान नहीं था. नई फसल, नई तकनीक और अलग तरीके की देखभाल की जरूरत थी. शुरुआत के दिनों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने खेती के बारे में जानकारी जुटाई और धीरे-धीरे आधुनिक तरीके अपनाने शुरू किए. उनकी मेहनत और सीखने की लगन ने उन्हें सफलता की राह दिखा दी. मोबाइल के जरिए काफी जानकारी मिली. यूट्यूब और कई अन्य माध्यम से काफी मदद मिली.

क्या-क्या उगा रहे

देवीदीन ने अपने खेत में बैंगन, टमाटर, मिर्च, लौकी, खीरा और करेला जैसी कई सब्जियों की खेती कर रहे हैं. उन्होंने अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन किया और समय-समय पर सिंचाई की व्यवस्था की. जैविक खाद का भी इस्तेमाल शुरू किया. इससे उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई और उत्पादन भी बढ़ गया. देवीदीन बताते हैं कि सब्जी की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. रोजमर्रा की जरूरत होने के कारण बाजार में सब्जियों की बिक्री लगातार होती रहती है. तैयार फसल आसपास की मंडियों और बाजारों में बेचते हैं. ताजी और अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियों के अच्छे दाम मिलते हैं.

कहां तक सप्लाई

देवीदीन बताते हैं कि तीन बीघा में 20 से 25 हजार रुपये की लागत आई है. इनकम लाखों में होगी. धान और गेहूं की खेती में मेहनत ज्यादा और कमाई कम थी. कई बार तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था. आज वह आर्थिक रूप से मजबूत बन चुके हैं. देवीदीन बताते हैं कि अपनी सब्जी की सप्लाई खरगूपुर मंडी, बलरामपुर मंडी और खेत से भी करते हैं.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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