युद्ध और वैश्विक तनाव का असर, 6 महीने में 40% तक महंगा हुआ कॉपर तार, मैकेनिकों पर संकट

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युद्ध और वैश्विक तनाव का असर, 6 महीने में 40% तक महंगा हुआ कॉपर तार, मैकेनिकों पर संकट


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Copper Wire Prices: कॉपर तार पहले की तुलना में लगभग दोगुना महंगा हो चुका है. इलेक्ट्रिक मोटर, पंखे, मोटर रिवाइंडिंग और वायरिंग से जुड़े मैकेनिकों की लागत काफी बढ़ गई है. दूसरी ओर ग्राहक इतनी ऊंची कीमत चुकाने को तैयार नहीं है. जिससे मैकेनिकों की आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है. कॉपर महंगा होने की वजह से अब काफी लोग एल्युमिनियम से काम कराना ज्यादा पसंद कर रहे है. 

वैश्विक तनाव और युद्ध के असर ने अब आम लोगों की जेब पर भी असर डालना शुरू कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तांबे की कीमतों में उछाल के चलते कॉपर तार महंगा हो गया है. जिससे घरों की वायरिंग, निर्माण कार्य और बिजली उपकरणों की लागत बढ़ने लगी है. कारोबारियों का कहना है कि सप्लाई प्रभावित होने और आयात लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में कीमतों पर और असर देखने को मिल सकता है.

करीब 9 साल से मोटर मैकेनिक का काम कर रहे दीपक बताते है कि पहले की तुलना में कॉपर के रेट में भारी बढ़ोतरी हुई है. पहले कॉपर काफी सस्ता था. उनके अनुसार पहले कॉपर 600 से 700 रुपए प्रति किलो के बीच मिल जाता था. लेकिन अब इसके दाम 1500 रुपए प्रति किलो से भी ऊपर पहुंच गए है. दीपक बताते है कि कॉपर का इस्तेमाल मोटर बांधने, पंखे बांधने और इंडक्शन मोटर में किया जाता है. कॉपर महंगा होने के कारण जब ग्राहक मोटर रिवाइंडिंग के लिए आते है और रेट सुनते है तो वे कॉपर की जगह दूसरी धातु में काम कराना पसंद करते है, क्योंकि कॉपर अब बहुत महंगा हो चुका है. अधिकतर लोग अब एल्युमिनियम में मोटर बंधवाने की ओर झुक रहे है.

युद्ध का सीधा असर कीमतों पर
दीपक का कहना है कि जब वे दुकान से कॉपर खरीदने जाते है तो दुकानदार और अन्य लोग साफ बताते है कि युद्ध की स्थिति के कारण कॉपर की कीमतों पर असर पड़ा है. जिस वजह से यह इतना महंगा हो गया है. फिलहाल कॉपर के दाम लगातार ऊंचे बने हुए है और आगे भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. कीमतों में गिरावट की कोई संभावना नजर नहीं आ रही.

करीब 20% से 40% तक बढ़ोतरी
पिछले छ महीने में कॉपर (तांबा) और उससे बनने वाले तारों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. बाजार के हिसाब से अलग-अलग ब्रांड और मोटाई (गेज) के तारों में फर्क होता है. लेकिन औसतन कॉपर की कीमत में करीब 20% से 40% तक बढ़ोतरी मानी जा रही है. कई निर्माण और बिजली क्षेत्र के कारोबारी भी बता रहे है कि कच्चे तांबे के दाम बढ़ने से वायरिंग का खर्च तेजी से बढ़ा है. वैश्विक मांग, बिजली उपकरणों की बढ़ती जरूरत, इलेक्ट्रिक वाहन, डेटा सेंटर और सप्लाई की कमी इसके बड़े कारण माने जा रहे है.

कॉपर तार का सबसे ज्यादा इस्तेमाल
कॉपर तार की सबसे बड़ी खासियत उसकी बेहतरीन बिजली चालक क्षमता होती है. यानी यह बिजली को तेजी और कम नुकसान के साथ प्रवाहित करता है. इसके अलावा यह जल्दी गर्म नहीं होता. मजबूत और टिकाऊ होता है. जंग कम लगती है और लंबे समय तक खराब हुए बिना काम करता है. इसी वजह से घरों की वायरिंग, मोटर, ट्रांसफॉर्मर, बिजली के उपकरण, मोबाइल चार्जर, उद्योग और बड़े बिजली नेटवर्क में कॉपर तार का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें



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