स्वाद में दमदार, कीमत भी डबल, लाल छोड़ काले पर आया इस किसान का दिल

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स्वाद में दमदार, कीमत भी डबल, लाल छोड़ काले पर आया इस किसान का दिल


Agency:News18 Uttar Pradesh

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काले गाजर की खेती!

बहराइच. जिले के कीर्तनपुर के रहने वाले किसान मखदूम पिछले कई सालों से काले गाजर की खेती करते आ रहे हैं.सबसे बड़ी बात यह है ये गाजर खुद ही उगा कर  मार्केट ले जाकर इनकी बिक्री करते हैं.जिससे इनको अच्छा मुनाफा होता है और बिचौलिया में मुनाफा लेने वाले का मुनाफा भी इनको मिल जाता है.कई बार ऐसा होता है कि जब हम अपने समान की बिक्री करने मण्डियों में ले जाते हैं,तो वह काफी कम कीमत मिलती है. जिससे बचने के लिए  किसान अपने हाथों से उगाकर खुद ही मार्केट में बेचते हैं. जिससे इनको बहुत अच्छा मुनाफा होता है.

इसकी खेती के लिए जरूरी बातें
खेत की अच्छे तरह से जोताई कर समतल कर लेना चाहिए.खेत में वर्मी कंपोस्ट खाद डालना और क्यारी बनाकर बीज बोना बहुत फायदेमंद होता है.अगर आप काले गाजर की खेती एक हेक्टेयर में कर रहे है तो,5 से 6 किलो बीज की जरूरत पड़ती है.बुवाई से पहले बीजों को 12-24 घंटे पानी में भिगो दें.बुवाई के 12-15 दिन बाद बीज अंकुरित हो जाते हैं.गर्मियों में 6-7 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें.सर्दियों में 10-12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें.खरपतवारों को हाथों से उखाड़कर बाहर निकालें इससे फसले अच्छे से ग्रोथ करती है.

खेती के लिए अच्छी मिट्टी
गाजर की वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए,खेती के लिए चुनी गई भूमि नरम और धरण युक्त होनी चाहिए.गाजर की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली गहरी ह्यूमस और अच्छी जल निकासी वाली 6 से 7 फुट मिट्टी का चयन करना उचित माना जाता है.जिले के रहने वाले मखदूम किसान इन्हीं सब वीडियो को फॉलो करते हुए पिछले 10 से 12 सालों से गाजर की खेती करते आ रहे हैं. गाजर का हलवा तो आपने खाया ही होगा लेकिन क्या कभी काली गाजर का हलवा खाया है खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है इस वजह से काली गाजर की मार्केट में डिमांड भी खूब होती है.

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