400 साल पुराना सिद्ध बाबा केलादा धाम, नाग-नागिन पूरी करते हैं मनोकामना

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400 साल पुराना सिद्ध बाबा केलादा धाम, नाग-नागिन पूरी करते हैं मनोकामना


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गोला तहसील क्षेत्र के अंतर्गत अलीगंज रोड पर नहर के आगे स्थित सिद्ध बाबा केलादा धाम क्षेत्र का एक प्रमुख आस्था केंद्र माना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान करीब 400 वर्षों से भी अधिक पुराना है. वर्षों से यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है और लोगों की बाबा के प्रति अटूट श्रद्धा देखने को मिलती है. इन मंदिरों से न केवल लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, बल्कि इनके साथ कई ऐतिहासिक और लोककथाएं भी प्रचलित हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और बाबा के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

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लखीमपुरः उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई धार्मिक और पौराणिक स्थल मौजूद हैं, जिनकी अपनी अलग पहचान और मान्यता है. इन मंदिरों से न केवल लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, बल्कि इनके साथ कई ऐतिहासिक और लोककथाएं भी प्रचलित हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और बाबा के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

गोला तहसील क्षेत्र के अंतर्गत अलीगंज रोड पर नहर के आगे स्थित सिद्ध बाबा केलादा धाम क्षेत्र का एक प्रमुख आस्था केंद्र माना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान करीब 400 वर्षों से भी अधिक पुराना है. वर्षों से यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है और लोगों की बाबा के प्रति अटूट श्रद्धा देखने को मिलती है.

यहां पूरी होती हैं मनोकामना

मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां आकर बाबा से अपनी मनोकामना मांगता है, उसकी इच्छा अवश्य पूरी होती है. यही वजह है कि लखीमपुर खीरी ही नहीं बल्कि आसपास के जनपदों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा के दरबार में आने से उन्हें मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों से राहत का अनुभव होता है. कई लोग नौकरी, व्यापार, शिक्षा, विवाह और संतान सुख जैसी मनोकामनाएं लेकर यहां आते हैं. जब किसी श्रद्धालु की मनोकामना पूरी हो जाती है तो वह पुनः बाबा के दरबार में पहुंचकर धन्यवाद स्वरूप भंडारे का आयोजन करता है. इसके अलावा कई परिवार यहां मुंडन संस्कार, नामकरण और अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी संपन्न कराते हैं.

मान्यता के लिए रखते हैं ईंट

बातचीत करते हुए कालिका दास ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है. यह सिद्ध बाबा का स्थान करीब 400 वर्षों से अधिक पुराना बताया जाता है. काफी दूर-दूर से श्रद्धालु सिद्ध बाबा के स्थान पर आते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं. इस स्थान की विशेषता है कि यहां मनोकामना मांगने के लिए ईंट रखी जाती है. उसके बाद जब मनोकामना पूर्ण हो जाती है तब इस ईट को हटाया जाता है. यहां सिद्ध बाबा का स्थान जंगल के किनारे और नदी के पास स्थित है. सबसे अधिक भीड़ सोमवार बुधवार और शुक्रवार को होती है. खास बात यह है कि सिद्ध बाबा स्थान पर कई वर्षों से नाग और नागिन रहते हैं. अपनी इच्छा के अनुसार वह निकलते हैं और उसके बाद वह पुनः पेड़ में ही चले जाते हैं मानी गई हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है. जिस कारण काफी दूर-दूर से भक्त आते हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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