नहीं उगने पाएगी खरपतवार? धान की नर्सरी के लिए ये ट्रिक जादुई, गोंडा के किसान से जानिए
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Paddy Nursery Tips : धान की खेती के लिए स्वस्थ नर्सरी ही बेहतर उत्पादन की नींव मानी जाती है. लेकिन इसमें उग आने वाली खरपतवार किसानों के लिए हमेशा से सिरदर्दी रहे हैं. ये खरपतवार धान के पौधों के साथ पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं. इससे पौधों की बढ़वार धीमी पड़ जाती है. लोकल 18 से गोंडा के प्रगतिशील किसान हरिओम मिश्रा बताते हैं कि धान की बुवाई के कुछ दिनों बाद ही नर्सरी में ये समस्या दिखनी शुरू हो जाती है.
गोंडा. खरीफ सीजन में धान की खेती की शुरुआत नर्सरी तैयार करने से होती है. अच्छी और स्वस्थ नर्सरी ही बेहतर उत्पादन की नींव मानी जाती है. लेकिन नर्सरी में उगने वाले खरपतवार (अनचाही घास) किसानों के लिए हमेशा से बड़ी समस्या रहे हैं. ये खरपतवार धान के पौधों के साथ पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और नर्सरी कमजोर पड़ सकती है. लोकल 18 से गोंडा के प्रगतिशील किसान हरिओम मिश्रा बताते हैं कि धान की बुवाई के कुछ दिनों बाद ही नर्सरी में खरपतवार उगना शुरू हो जाते हैं. यदि इन्हें समय रहते नहीं हटाया गया तो ये तेजी से फैल जाते हैं और धान के पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता. इससे पौधे कमजोर रह जाते हैं और बाद में खेत में रोपाई के समय भी उनका विकास प्रभावित हो सकता है.
पहले ही कर लें ये काम
हरिओम के मुताबिक, इससे बचाव के लिए किसानों को नर्सरी का नियमित निरीक्षण करना चाहिए. जहां भी खरपतवार दिखाई दें, उन्हें शुरुआती अवस्था में ही निकाल देना चाहिए. छोटे खरपतवारों को हाथ से निकालना आसान होता है और इससे उनका फैलाव भी रुक जाता है. यदि खरपतवार अधिक मात्रा में हों तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर उचित खरपतवार नाशक दवा का उपयोग किया जा सकता है.
हरिओम मिश्रा के अनुसार, नर्सरी में पानी का सही प्रबंधन भी बहुत जरूरी है. जरूरत से ज्यादा या बहुत कम पानी होने पर खरपतवार तेजी से बढ़ सकते हैं. इसलिए किसानों को नर्सरी में संतुलित मात्रा में पानी बनाए रखना चाहिए. इसके साथ ही समय-समय पर पौधों की स्थिति पर नजर रखना भी आवश्यक है. स्वस्थ नर्सरी तैयार करने के लिए साफ खेत का चयन, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज और उचित देखभाल जरूरी है. यदि शुरुआत से ही खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए तो धान की पौध मजबूत और हरी-भरी तैयार होती है. ऐसी पौध खेत में रोपाई के बाद तेजी से बढ़ती है और बेहतर पैदावार देने में मदद करती है.
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसान नर्सरी में किसी भी प्रकार की समस्या को नजरअंदाज न करें. खरपतवार की समस्या छोटी दिख सकती है, लेकिन समय पर नियंत्रण न होने पर यह उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. इसलिए नियमित निगरानी और सही प्रबंधन बेहद जरूरी है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें