क्या होता है बोंगा या गुगा? बरसात में पशुओं का चारा नहीं होता है खराब
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Lakhimpur Kheri News: बोंगा बनाने का काम इन दिनों जोरों पर है. किसान खेतों और घरों के पास बांस, सरपत, लकड़ी और रस्सियों की मदद से बोंगा तैयार करते हैं. इसके बाद उसमें भूसा भरकर ऊपर से अच्छी तरह ढक दिया जाता है, जिससे बारिश और नमी का असर नहीं पड़ता है.
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी समेत ग्रामीण इलाकों में गेहूं की कटाई के बाद पशुओं के लिए भूसा सुरक्षित रखने का काम तेजी से किया जाता है. इसके लिए किसान आज भी पारंपरिक बोंगा का इस्तेमाल कर रहे हैं. बोंगा एक बड़ा गोलाकार ढांचा होता है, जिसमें सालभर के लिए भूसा भरकर सुरक्षित रखा जाता है.
ग्रामीण क्षेत्रों में बोंगा बनाने का काम इन दिनों जोरों पर है. किसान खेतों और घरों के पास बांस, सरपत, लकड़ी और रस्सियों की मदद से बोंगा तैयार करते हैं. इसके बाद उसमें भूसा भरकर ऊपर से अच्छी तरह ढक दिया जाता है, जिससे बारिश और नमी का असर नहीं पड़ता है. बोंगा में रखा भूसा लंबे समय तक खराब नहीं होता और पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में उपयोग किया जाता है.
पूरे साल चारे की दिक्कत नहीं
बोंगा आज भी कम खर्चीला और प्रभावी तरीका माना जाता है. एक बार तैयार होने के बाद इसमें बड़ी मात्रा में भूसा रखा जा सकता है, जिससे पशुपालकों को पूरे वर्ष चारे की चिंता नहीं रहती है. बोंगा को सही तरीके से बनाया जाए और उसमें नमी न पहुंचने दी जाए तो भूसा लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा आज भी जीवित है और किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है.
सुरक्षित और किफायती साधन
लोकल 18 से बातचीत करते हुए किसान परमवीर सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बोंगा (कुछ इलाकों में ऐसे बोंगा) को भूसा भंडारण का सबसे सुरक्षित और किफायती साधन माना जाता है. पशुपालकों के लिए भूसा सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. ऐसे में गुगा आज भी ग्रामीण जीवन और पशुपालन का अहम हिस्सा बना हुआ है. यही वजह है कि हर वर्ष फसल कटाई के बाद गांवों में गुगा बनाने और उसमें भूसा भरने की परंपरा देखने को मिलती है.
बरसात के मौसम में भूसा सुरक्षित
कहीं ऐसे किसान हैं, जो भूसा भरने के लिए टीन सेट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं. ऐसे में आज भी किसान भूसा को सुरक्षित रखने के लिए गुगा का इस्तेमाल करते हैं. खास बात यह है कि बरसात के मौसम में भी भूसा खराब नहीं होता है. एक बार बनाए जाने के बाद करीब 2 साल तक आप भूसे को सुरक्षित रख सकते हैं. इसे बनाने के लिए अधिक पैसों की जरूरत नहीं होती है. गांवों के कारीगर इन दिनों किसानों की मांग के अनुसार गुगा तैयार करने में व्यस्त हैं. कई परिवार इस पारंपरिक कला के जरिए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.