कानपुर में पनकी के भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट में कूड़े के पहाड़ों से उठता जहरीला धुंआ
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लोकल 18 की टीम जब दोपहर में भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट पहुंची तो लगातार कूड़ा लेकर आने वाले ट्रकों की आवाजाही जारी थी. प्लांट के भीतर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दिए, जिनसे कई जगह धुआं निकल रहा था. कुछ देर वहां रुकने पर ही बदबू और घुटन साफ महसूस होने लगी. पास में दुकान चलाने वाले स्थानीय निवासी राजेश पाल ने बताया, अब तो गले में खराश और खांसी रोज की बात हो गई है. घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने के बाद भी बदबू अंदर आ जाती है. कई बार रिश्तेदार भी यहां आने से कतराते हैं.
कानपुरः कानपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद शहर में विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन पनकी के भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट के आसपास रहने वाले हजारों परिवारों की जिंदगी आज भी बदबू, धुएं और कूड़े के पहाड़ों के बीच गुजर रही है. यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि शाम होते ही पूरा इलाका धुएं की चादर में ढक जाता है. कई किलोमीटर दूर तक बदबू फैल जाती है और सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है. उनका आरोप है कि पिछले कई वर्षों से यही हाल है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका.
धुएं और बदबू के बीच बीत रही जिंदगी
लोकल 18 की टीम जब दोपहर में भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट पहुंची तो लगातार कूड़ा लेकर आने वाले ट्रकों की आवाजाही जारी थी. प्लांट के भीतर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दिए, जिनसे कई जगह धुआं निकल रहा था. कुछ देर वहां रुकने पर ही बदबू और घुटन साफ महसूस होने लगी. पास में दुकान चलाने वाले स्थानीय निवासी राजेश पाल ने बताया, अब तो गले में खराश और खांसी रोज की बात हो गई है. घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने के बाद भी बदबू अंदर आ जाती है. कई बार रिश्तेदार भी यहां आने से कतराते हैं. वहीं, धर्मेंद्र निषाद ने कहा, शाम के समय हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं. धुएं की वजह से बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है. कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत रहती है और रात में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है.
18 गांवों पर असर, बीमारी का डर सता रहा
भाऊ सिंह वेस्ट प्लांट के आसपास सरायमीता, बदुआपुर, जमुई, पनका, छीतेपुर, कलकपुरवा, सुंदर नगर, पनकी पड़ाव, बहादुर नगर, सरसई, गंगागंज, पतरसा समेत करीब 18 गांव और बस्तियां हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि कूड़े के ढेरों से उठने वाला धुआं और दुर्गंध अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. कई परिवारों का कहना है कि घर में किसी न किसी सदस्य को खांसी, एलर्जी, सांस या त्वचा से जुड़ी समस्या बनी रहती है. लोगों को यह भी डर है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं.
2009 से चल रहा प्लांट, फिर उठे सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह प्लांट वर्ष 2009 से संचालित हो रहा है. इस दौरान कई बार विरोध प्रदर्शन हुए और विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी सामने आई, लेकिन कूड़े के ढेर लगातार बढ़ते गए. लोगों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन मिले, राहत नहीं.नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कहा, “प्लांट संचालकों को सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन करने के निर्देश कई बार दिए जा चुके हैं. यदि कहीं लापरवाही मिलती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.”अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कानपुर स्मार्ट सिटी बनने का दावा करता है, तब क्या पनकी के इन गांवों को भी साफ हवा और स्वस्थ माहौल में जीने का अधिकार मिल पाएगा, या फिर लाखों लोग यूं ही धुएं और बदबू के बीच अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर रहेंगे.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें