राम मंदिर ट्रस्ट से मुझे हटाया नहीं, गोपाल राव का दावा खड़े कर रहा ये 5 सवाल
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Ram Mandir Gopal Rao News : अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े घटनाक्रमों में नित नए मोड़ देखने को मिल रहे हैं. निष्कासन की खबरों के बीच पहली बार मीडिया के सामने आए गोपाल राव के बयानों ने इस पूरे मामले को सुलझाने के बजाय और उलझा दिया है. सवाल ये उठ रहा है कि गोपाल राव पर क्या कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. आइये जानते हैं इस बारे में डिटेल में…
अयोध्या राम मंदिर विवाद : क्या गोपाल राव पर नहीं हुआ कोई एक्शन? बयानों से खड़े हुए 5 बड़े सवाल
अयोध्या : अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले से चर्चा में आए गोपाल राव ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. लेकिन उनके इस बयान ने एक नया विवाद और कई सवाल खड़े हो हैं. गोपाल राव के दावों को अगर सच माना जाए, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या वाकई उन पर राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से कोई कार्रवाई हुई ही नहीं है? या फिर इस पूरे मामले को सिर्फ ‘ठंडे बस्ते’ में डालने की कोशिश की जा रही है? ऐसे कई सवाल उनके बयान के बाद उठ रहे हैं.
पहला सवाल : ‘निष्कासन’ या सिर्फ ‘ब्रेक’? ट्रस्ट की चुप्पी का राज क्या है?
मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखते हुए गोपाल राव ने कहा कि मुझे राम मंदिर ट्रस्ट से नहीं हटाया गया है, बल्कि कुछ समय के लिए बैठकों में नहीं आने को कहा गया है. इसके बाद बड़ा सवाल ये है कि अगर किसी अधिकारी पर इतने गंभीर आरोप लगते हैं, तो क्या केवल ‘बैठकों में न आने की सलाह’ देना एक पर्याप्त कार्रवाई है? क्या इसे तकनीकी रूप से निष्कासन माना जाए या फिर सिर्फ एक अस्थायी व्यवस्था, ताकि जनता की नाराजगी खत्म हो सके.
दूसरा सवाल : दान पात्र चोरी की बात कबूली, तो फिर ‘एक्शन’ में ढिलाई क्यों?
गोपाल राव ने साफ तौर पर कहा कि दान पात्र चोरी के अलावा बाकी सभी आरोप गलत हैं. उनके ऐसा कहने से भी एक बड़ा सवाल ये उठता है कि बड़ा सवाल जब गोपाल राव खुद यह स्वीकार कर रहे हैं कि दान पात्र चोरी की घटना हुई है, तो फिर इस मामले में जवाबदेही किसकी तय होगी? अगर वह खुद को बाकी आरोपों से अलग कर रहे हैं, तो क्या दान पात्र की सुरक्षा में हुई इस बड़ी चूक के लिए उन पर कोई संगठनात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी?
तीसरा सवाल : नैतिकता का पैमाना अलग-अलग क्यों?
गोपाल राव का एक और बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा है कि नैतिकता के आधार पर कुछ लोगों ने इस्तीफा दिया, लेकिन मेरा मामला अलग है. जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा को नैतिकता के आधार पर पद से हटा दिया जाता है तो गोपाल राव का मामला ‘अलग’ कैसे हो जाता है? हालांकि उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य के पद से हटा दिया गया है, लेकिन उनका ये कहना कि मेरा मामला अलग है, यह सवाल खड़े करता है.
चौथा सवाल : आठ आरोपियों पर पल्ला झाड़ना कितना सही?
गोपाल राव ने अपने बयान में यह भी कहा कि 8 आरोपियों पर कार्रवाई पुलिस करेगी, यह हमारा काम नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि मंदिर की व्यवस्थाएं ठीक चल रही हैं, अफवाहों पर ध्यान न दें और सारा सोना-चांदी व दान सुरक्षित है, जिसे कोई भी आकर जांच सकता है. लेकिन बात तो ये भी है ना कि बेशक पुलिस अपना काम करेगी, लेकिन क्या ट्रस्ट की आंतरिक जांच का कोई औचित्य नहीं बनता?
पांचवां सवाल : कार्रवाई का दिखावा या परदे के पीछे कुछ और?
गोपाल राव के इस बेबाक बयान ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्रवाई को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है. उनके बयानों से साफ है कि वह खुद को पूरी तरह सुरक्षित मान रहे हैं. ऐसे में जनता और राम भक्तों के मन में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर गोपाल राव पर कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ? क्या बैठकों से कुछ समय के लिए दूरी बना लेना ही इतने बड़े विवाद का अंत है, या फिर आने वाले दिनों में पुलिस और ट्रस्ट की तरफ से कोई बड़ा चौंकाने वाला कदम देखने को मिलेगा?
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I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal Pradesh and Haryana. With over 17 years of experience in jou…और पढ़ें