गोकुल छोड़ क्यों विंध्याचल गए थे कृष्ण-राधा? जानें कंस के अत्याचार की कहानी
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क्या आप जानते हैं कि साक्षात भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी को अपना प्रिय गोकुल क्यों छोड़ना पड़ा था? द्वापर युग में कंस के राक्षसों ने गोकुल वासियों पर इतने भीषण अत्याचार किए कि वहां रहना असंभव हो गया. अंततः नंदबाबा और बृज के सबसे बड़े राजा वृषभान ने प्रजा की रक्षा के लिए गोकुल त्यागने का बड़ा फैसला लिया. मथुरा के सेवायत पुजारियों से जानिए 5251 वर्ष पुराना इतिहास और विंध्याचल पर्वत पर नए नगर बसने की पूरी कहानी.
मथुरा: युग चाहे सतयुग हो, त्रेता हो या द्वापर… हर काल में देवताओं पर राक्षसों के अत्याचारों की कहानियां इतिहास में दर्ज हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि द्वापर युग में साक्षात भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी को भी कंस के राक्षसों के भीषण अत्याचारों के कारण अपना प्यारा गोकुल छोड़ना पड़ा था? आखिर कंस के खौफ और राक्षसों के आतंक के बीच गोकुल वासियों पर क्या गुजरी कि नंदबाबा और राजा वृषभान को गोकुल त्यागने का बड़ा फैसला लेना पड़ा? आइए आपको बताते हैं इसके पीछे की पूरी पौराणिक और ऐतिहासिक वजह.
कंस की कारागार में हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म
द्वापर युग में आज से 5251 वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कंस की कारागार में हुआ. कंस ने अपनी चचेरी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को जेल में डालकर रखा था, इसीलिए कृष्ण का जन्म वहां हुआ. दरअसल, आकाश मार्ग से हुई एक आकाशवाणी ने कंस को और अधिक अत्याचारी बना दिया था. उसने अपने पिता को भी कई वर्षों तक कारागार में बंदी बनाकर रखा था. कंस द्वारा अपनी बहन और बहनोई को बंदी बनाने की वजह भी यही थी.
आकाशवाणी के बाद गोकुल पर बढ़ा अत्याचार
आकाश मार्ग से हुई उस आकाशवाणी में कंस के वध का कारण उसके भांजे को बताया गया था. जब श्रीकृष्ण ने जन्म लिया, तो वासुदेव उन्हें यमुना पार कराकर गोकुल छोड़ आए. कंस को जब यह पता चला कि कृष्ण का जन्म हो चुका है, तो बृज के लोगों पर कंस के अत्याचार और ज्यादा बढ़ गए. कंस अपने राक्षसों को गोकुल भेजकर नए-नए पैंतरे आजमाते हुए गोकुल वासियों को परेशान करता था. कई बार तो कंस के राक्षस गोकुल वासियों को मृत्युदंड भी दे चुके थे.
सेवायत पुजारियों ने बताया गोकुल छोड़ने का सच
नंद बाबा मंदिर के सेवायत पुजारी मोर मुकुट पाराशर और रावल मंदिर की सेवायत रमा देवी ने ‘लोकल 18’ से बातचीत करते हुए बताया कि कंस मथुरा का राजा हुआ करता था. वह अपने राक्षसों को अत्याचार करने के लिए गोकुल भेजा करता था. गोकुल में आकर राक्षस यहाँ के लोगों को प्रताड़ित करते थे. जब कृष्ण ने कई राक्षसों को मार गिराया, तो कंस विचलित हो गया. गोकुल में जब कंस के अत्याचार अत्यधिक बढ़ने लगे, तो राधा और कृष्ण के पिताओं ने यह निर्णय लिया कि वे गोकुल छोड़कर यहाँ से कहीं दूर चले जाएंगे. इसके बाद वे मथुरा से तकरीबन 60 किलोमीटर दूर विंध्याचल पर्वत पर पहुंच गए.
नंदबाबा और राजा वृषभान का बड़ा फैसला
उन्होंने वहां जाकर अपने-अपने नगर बसा लिए. राधा-कृष्ण के गोकुल छोड़ने की यही मुख्य वजह रही कि कंस के राक्षस लगातार बृजवासियों को परेशान कर रहे थे. श्रीकृष्ण के जन्म के बाद से ही कंस का प्रकोप गोकुल में बहुत बढ़ गया था और यहाँ के लोग बेहद परेशान हो चुके थे. अंततः नंदबाबा ने स्थानीय राजाओं को इकट्ठा किया. उस वक्त बृज के सबसे बड़े राजा वृषभान थे, जिनके पास 11 लाख गाय थीं, जबकि नंद जी के पास 9 लाख गाय थीं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें