क्या आप भी बोने जा रहे मूंग या उड़द, बुवाई से पहले बीज उपचार जरूरी, लेकिन उसके बाद क्या?
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Moong Urad Farming : मानसून की दस्तक के साथ मूंग और उड़द की बुवाई का सही समय आ गया है. जिनके पास सिंचाई के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे किसान अपने ऊंचे खेतों में मूंग और उड़द की बुवाई कर सकते हैं. शाहजहांपुर के किसान रनजोद सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि बुवाई से पहले बीज उपचार जरूरी है. इसके लिए फफूंदनाशक और राइजोबियम कल्चर का प्रयोग करें. बेहतर उत्पादन के लिए बुवाई हमेशा लाइनों में करनी चाहिए. लाइन से लाइन की दूरी 30-45 सेमी और गहराई 4-5 सेमी रखें. बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर की अनुशंसित मात्रा खेत में डालें. फूल आने और फली बनते समय बारिश न हो, तो हल्की सिंचाई जरूर करें.
शाहजहांपुर. जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की दस्तक के साथ ही किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है. खासकर उन किसानों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है जिनके पास सिंचाई के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे किसान अपने ऊंचे खेतों में मूंग और उड़द की बुवाई कर सकते हैं. मानसून की यह शुरुआती बारिश इन फसलों के जमाव के लिए अमृत समान है. सही समय पर बुवाई और उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करके किसान कम लागत में भी बंपर पैदावार ले सकते हैं. शाहजहांपुर के प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि कम सिंचाई वाले क्षेत्रों और ऊंचे खेतों के लिए मानसून के आगमन पर मूंग और उड़द की बुवाई करना सबसे सटीक समय है. किसानों को सबसे पहले जलभराव से बचने के लिए खेतों में जल निकासी का अच्छा प्रबंध करना चाहिए.
पैदावार बढ़ाएगी ये ट्रिक
किसान रनजोद बताते हैं कि बुवाई से पहले बीज उपचार (Seed Treatment) बेहद जरूरी है. इसके लिए फफूंदनाशक और राइजोबियम कल्चर का प्रयोग करें. लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें. संतुलित उर्वरक प्रबंधन और शुरुआती 20-25 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण करने से फसल का उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. मूंग और उड़द की खेती में सबसे महत्वपूर्ण बात खेत का चुनाव करना है. पानी का भराव फसलों को बर्बाद कर सकता है, इसलिए ऊंचे और अच्छे जल निकासी वाले खेतों का चुनाव करें. बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर करवाएं. प्रमाणित व रोग-प्रतिरोधी उन्नत किस्मों के बीजों का ही चयन करें. सही समय पर खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन से फसलों को पीला मोजेक जैसे घातक वायरस से बचाया जा सकता है.
बुवाई की सही विधि
बेहतर उत्पादन के लिए बुवाई हमेशा लाइनों में करनी चाहिए. इसके लिए ‘सीड ड्रिल’ का उपयोग सबसे बेहतर माना जाता है. लाइन से लाइन की दूरी 30-45 सेमी और गहराई 4-5 सेमी रखें. बुवाई के तुरंत बाद अगर तेज बारिश की संभावना हो, तो बीजों को थोड़ा गहरा बोएं ताकि वे बह न जाएं. याद रखें, बीज उपचार करने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जमाव शत-प्रतिशत होता है. ज्यादा पैदावार के लिए केवल मानसून पर निर्भर न रहें, बल्कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाएं. बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर की अनुशंसित मात्रा खेत में डालें. फूल आने और फली बनते समय यदि बारिश न हो, तो हल्की सिंचाई करें. एनपीके (NPK) और सूक्ष्म पोषक तत्वों का पत्तियों छिड़काव (Foliar Spray) करने से फलियों का विकास अच्छा होता है और दानों में चमक आती है.
कितने दिन में तैयार?
किसान रनजोद के मुताबिक, दलहनी फसलें होने के कारण मूंग और उड़द की खेती से दोहरे लाभ मिलते हैं. ये फसलें हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में फिक्स करती हैं, जिससे खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है. यह 60-70 दिन में तैयार होने वाली नकदी फसलें हैं, जिससे किसानों को कम समय में अच्छा मुनाफा मिलता है. बाजार में दालों की मांग हमेशा ऊंची रहने के कारण किसानों को इसके बेहतर दाम आसानी से मिल जाते हैं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें