बारिश के मौसम मे मिल्की मशरूम की करें खेती, ऐसे तैयार करें बैग, इस तापमान में बंपर पैदावार

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बारिश के मौसम मे मिल्की मशरूम की करें खेती, ऐसे तैयार करें बैग, इस तापमान में बंपर पैदावार


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मशरूम की फसल में सबसे मुख्य रहता है तापमान और बरसात के मौसम में सहारनपुर का तापमान 25 से 35 डिग्री के बीच रहता है. इस तापमान में अच्छी फ्रुटिंग देने वाली मशरूम कौन सी होती है और कैसे उसके बैग तैयार किया जा सकते हैं. जिससे कि बरसात के मौसम में हम अन्य फसलों के मुकाबले मशरूम से कई गुना अधिक मुनाफा ले सकते हैं. मशरूम की फसल एक ऐसी फसल होती है जिसमें लागत कम और देखरेख ज्यादा करनी पड़ती है. जबकि यह मंडी में भी अन्य फसलों से कई गुना अधिक दाम पर बिकती है और किसानों की आय बढ़ाने का काम भी करती है.

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सहारनपुर: सहारनपुर जनपद जोकि मशरूम उत्पादन में प्रदेश में नंबर एक स्थान रखता है. यहां के युवा किसान ज्यादातर नौकरी की और न भाग कर अपना खुद का रोजगार करना बेहद पसंद करते हैं. उसी में सबसे ज्यादा युवा किसान मशरूम की खेती की और तेजी से बढ़ रहे हैं. मशरूम की खेती एक फफूंद की दार खेती होती है जिसको करने के लिए बंद झोपड़ी या फिर कमरे की आवश्यकता पड़ती है. जुलाई में बरसात का मौसम शुरू हो जाता है और बरसात के मौसम में मशरूम की कौन सी वेराइटी को लगाकर अच्छा पैसा कमाया जा सकता है.

मशरूम की खेती में तापमान का अहम रोल

मशरूम की फसल में सबसे मुख्य रहता है तापमान और बरसात के मौसम में सहारनपुर का तापमान 25 से 35 डिग्री के बीच रहता है. इस तापमान में अच्छी फ्रुटिंग देने वाली मशरूम कौन सी होती है और कैसे उसके बैग तैयार किया जा सकते हैं. जिससे कि बरसात के मौसम में हम अन्य फसलों के मुकाबले मशरूम से कई गुना अधिक मुनाफा ले सकते हैं. मशरूम की फसल एक ऐसी फसल होती है जिसमें लागत कम और देखरेख ज्यादा करनी पड़ती है. जबकि यह मंडी में भी अन्य फसलों से कई गुना अधिक दाम पर बिकती है और किसानों की आय बढ़ाने का काम भी करती है.

कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी व प्रोफेसर डॉक्टर आई.के कुशवाहा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि सहारनपुर जनपद में मशरूम का सबसे ज्यादा उत्पादन हो रहा है जिसमें ग्रामीण युवा काफी जुड़े हुए हैं और यहां का वातावरण मशरूम की खेती को सूट करता है.

बारिश के मौसम में ऐसे करें मशरूम की खेती

अगर हम बात करे बरसात के मौसम में मशरूम की कौन सी वेराइटी को लगा सकते हैं. क्योंकि बरसात के मौसम में जो वातावरण का टेंपरेचर रहता है. वह 25 से 35 डिग्री तक होता है. टेंपरेचर के हिसाब से देखे तो मिल्की मशरूम (Calocybe indica) बहुत ही सूट करता है. इसका उत्पादन करने के लिए झोपड़ी या फिर कमरे की आवश्यकता पड़ती है. इसके बैग तैयार करके जमीन पर भी रखे जा सकते हैं और रैक बनाकर भी इसका उत्पादन लिया जा सकता है. इसका बैग तैयार करने के लिए जो रो मटेरियल लगता है उसमें गन्ने का पुवाल, गेंहू का भूसा, सरसों की तुड़ी और दलहन/तिलहन की तुड़ी भी हो सकती है.

कोई भी फसल अवशेष हो जिसमें उत्पादन करना है वह भीगा हुआ नहीं होना चाहिए. फिर उस फसल अवशेष को शोधित करने के लिए हवादार आलू वाले कट्टे में भूसे को भरकर के पानी में रख दे और 18 घंटे बाद उसको निकाल करके उसमें मिल्की मशरूम का स्पान मिलकर के उनको छोटे-छोटे बैग में भरकर के बंद कमरे में रख देते हैं और 15 से 20 दिन में यह रन होने लगता है. उसके बाद उसमें केसर मिट्टी तैयार करके डेढ़ इंच की लेयर ऊपर की ओर लगा देते हैं जिसके 7 दिन के बाद मशरूम निकलना शुरू हो जाता है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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