अरहर की फसल का ये सबसे घातक दुश्मन, बिन इसे मिटाए नहीं होगी अच्छी पैदावार, कैसे करें सफाया?
Arhar farming tips : खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान अरहर की बुआई में जुट गए हैं. कृषि एक्सपर्ट बताते हैं कि अरहर की बेहतर उपज और सुरक्षित फसल के लिए केवल बीजों का चयन ही काफी नहीं है, बल्कि बुआई से पहले भूमि का शोधन करना बेहद जरूरी है. भूमि शोधन से मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंद, जीवाणु और कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल शुरुआती दौर से ही स्वस्थ रहती है. शाहजहांपुर के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि अरहर को कीटों और रोगों से सुरक्षित रखने के लिए भूमि का जैविक शोधन सबसे बेहतर तरीका है. किसान ट्राइकोडर्मा, बवेरिया बेसियाना और सूडोमोनास का गोबर की खाद के साथ मिलाकर कल्चर तैयार करें. इसके इस्तेमाल से मिट्टी में मित्र जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है और हानिकारक फफूंद व कीटों का नाश होता है. डॉ. हादी के मुताबिक, अरहर की फसल में नेमाटोड नामक बीमारी का प्रकोप काफी देखा जाता है. इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए पेसिलोमायसिस का एक से दो किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि शोधन के समय इस्तेमाल करना चाहिए. किसान चाहें तो 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से नीम की निबोली या नीम की खली को खेत में मिला सकते हैं. यह प्राकृतिक उपाय मिट्टी में पनपने वाले हानिकारक कीड़ों और नेमाटोड का पूरी तरह सफाया कर देता है.