कहने को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, लेकिन एंट्री-एक्जिट कोई नहीं, जाना होगा उन्नाव

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कहने को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, लेकिन एंट्री-एक्जिट कोई नहीं, जाना होगा उन्नाव


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Kanpur Lucknow Expressway: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से मात्र 35 मिनट में सफर पूरा होने का दावा सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. लेकिन क्या सचमुच कानपुर के लोग इतनी जल्दी लखनऊ पहुंच पाएंगे? फजलगंज से शुरू हुई हमारी इस ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि कैसे शहर के भारी ट्रैफिक और उन्नाव से शुरू होने वाले एक्सप्रेसवे के कारण दावों की रफ्तार पर ब्रेक लग रहा है.

Kanpur Lucknow Expressway: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद से ‘सिर्फ 35 मिनट में सफर’ का दावा हर तरफ गूंज रहा है. विकास की इस रफ्तार को सुनकर हर कोई उत्साहित है, लेकिन क्या वाकई कानपुर की जनता घर से निकलने के आधे घंटे बाद नवाबों के शहर में होगी? इसी दावे की जमीनी हकीकत और दावों के पीछे के सच को खंगालने के लिए हमारी टीम ने एक स्पेशल ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. आइए जानते हैं कि रफ्तार के इस गलियारे तक पहुंचने में कानपुर वालों को असल में कितनी जद्दोजहद करनी पड़ रही है.

11 बजकर 34 मिनट पर लोकल-18 की टीम ने कानपुर के फजलगंज इलाके से अपना सफर शुरू किया. हमारा मकसद लखनऊ पहुंचना नहीं था, बल्कि यह देखना था कि कानपुर शहर के अंदर से निकलकर आखिर कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के एंट्री प्वाइंट तक पहुंचने में कितना समय लगता है. हमने ऐसा रास्ता चुना जहां ट्रैफिक सबसे कम था. फजलगंज से निकलने के बाद हमारी गाड़ी नौबस्ता की तरफ बढ़ी और वहां से एक्सप्रेसवे के प्रवेश मार्ग की ओर रवाना हुई. रास्ते में हमें कहीं भी बड़ा जाम नहीं मिला और ट्रैफिक भी सामान्य से कम रहा.

इसके बावजूद एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में हमें पूरे 42 मिनट का समय लग गया. 12 बजकर 16 मिनट पर हम उस जगह पहुंचे जहां से कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर वाहनों की एंट्री शुरू होती है. यानी शहर के अंदर से निकलकर सिर्फ एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में ही लगभग उतना समय लग गया, जितने समय में लोगों को कानपुर से लखनऊ पहुंचाने का दावा किया जा रहा है.

बड़े चौराहों से निकलने वालों के लिए और बढ़ सकता है समय
हमारा सफर ऐसे समय में हुआ जब सड़क पर ट्रैफिक अपेक्षाकृत कम था और हमें कहीं भी लंबे जाम का सामना नहीं करना पड़ा. लेकिन अगर कोई व्यक्ति बड़ा चौराहा, घंटाघर, स्वरूप नगर, या शहर के दूसरे व्यस्त इलाकों से निकलता है तो एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में 1 घंटे से लेकर 1 घंटा 20 मिनट तक का समय लग सकता है. कानपुर की सड़कों पर रोजाना लगने वाले जाम और व्यस्त चौराहों की स्थिति को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि शहर के अधिकांश लोगों के लिए एक्सप्रेसवे तक 40 मिनट से पहले पहुंचना बेहद मुश्किल है.

कानपुर नहीं, उन्नाव से शुरू होता है एक्सप्रेसवे
इस पूरी कहानी का एक दूसरा पहलू भी है. इसका नाम भले ही कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे रखा गया है, लेकिन इसकी शुरुआत कानपुर शहर की सीमा से नहीं होती है. कानपुर की सीमा जाजमऊ स्थित गंगा पुल तक मानी जाती है. गंगा पुल पार करने के बाद लगभग 5 किलोमीटर आगे बढ़ने पर उन्नाव जिले की सीमा में इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत होती है. यानी तकनीकी तौर पर देखा जाए तो एक्सप्रेसवे का शुरुआती हिस्सा कानपुर में नहीं बल्कि उन्नाव में स्थित है. ऐसे में कानपुर के लोगों को पहले शहर के ट्रैफिक से जूझते हुए उन्नाव तक पहुंचना पड़ता है और उसके बाद उन्हें एक्सप्रेसवे की तेज रफ्तार का फायदा मिलता है.

जब तक शहर के ट्रैफिक का हल नहीं, तब तक अधूरा रहेगा फायदा
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निश्चित रूप से दोनों शहरों के बीच सफर को आसान और तेज बनाने वाला बड़ा प्रोजेक्ट है. लेकिन अगर शहर के अंदर के ट्रैफिक को नियंत्रित नहीं किया गया और कानपुर शहर से एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए कोई समर्पित कनेक्टिंग रोड, बाईपास या तेज संपर्क मार्ग तैयार नहीं किया गया, तो कानपुर के लोगों को इसका पूरा लाभ मिलना मुश्किल होगा. फिलहाल जमीनी हकीकत यही कहती है कि एक्सप्रेसवे पर गाड़ी जरूर तेज दौड़ेगी, लेकिन वहां तक पहुंचने की जद्दोजहद ही यात्रियों का सबसे ज्यादा समय खा रही है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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