आगरा का चमत्कारी चामुंडा मंदिर, 30 साल से जल रही है अखंड ज्योत
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Agra Chamunda Devi Temple: ताजनगरी आगरा सिर्फ मुगलकालीन इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने आंचल में छिपे बेहद प्राचीन और चमत्कारी धार्मिक रहस्यों के लिए भी जानी जाती है. यमुना किनारे जंगलों के बीच बसा एक ऐसा ही चमत्कारी मंदिर है ‘मां चामुंडा देवी मंदिर’. जहां पिछले 30 वर्षों से आंधी-तूफान और हर मौसम का सीना चीरते हुए लगातार दिव्य अखंड ज्योत जल रही है. मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की न सिर्फ हर मनोकामना पूरी होती है, बल्कि माता रानी स्वयं उनकी दुश्मनों से रक्षा करती हैं.
Agra Chamunda Devi Temple: उत्तर प्रदेश के आगरा को प्राचीन नगरी कहा जाता है. मुगल धरोहरों के अतिरिक्त आगरा में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें बेहद कम ही लोग जानते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताएंगे जो आगरा शहर से करीब 12-13 किलोमीटर दूर जंगलों की तरफ बना हुआ है. यह प्राचीन मंदिर मां चामुंडा देवी का है. यहां स्थापित प्रतिमा कई वर्षों प्राचीन है. यहां के पुजारी ने बताया कि कई वर्षों पहले यह प्रतिमा एक पेड़ के पास थी, बाद में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया. यमुना किनारे यह एकमात्र मां चामुंडा देवी का मंदिर है.
30 वर्षों से लगातार जल रही है अखंड ज्योत, दुश्मनों से रक्षा करती हैं मैया
उन्होंने कहा कि यहां पिछले 30 सालों से लगातार अखंड ज्योत जल रही है. पुजारी ने बताया कि मां देवी में इतनी शक्ति है कि यहां दर्शन करने वाले भक्तों को उनके दुश्मनों से मैया बचाती हैं. पुजारी ने बताया कि मैया की पूजा-अर्चना किसी भी दिन की जा सकती है. उन्होंने कहा कि यदि शुभ फलों के लिए चतुर्दशी तिथि और नवरात्रि (विशेषकर अष्टमी तिथि) के दिन माता की पूजा की जाए, तो यह अत्यधिक फलदायी मानी जाती है.
रुनकता के जंगलों में स्थित दिव्य धाम, आंधी-तूफान में भी नहीं बुझती ज्योत
आगरा से करीब 12 से 13 किलोमीटर दूर रुनकता के जंगलों के पास यह प्राचीन मां चामुंडा देवी मंदिर स्थित है. यह मंदिर बिल्कुल यमुना नदी के किनारे बना हुआ है. यहां एक घाट भी बना हुआ है, जहां लोग आकर पूजा-अर्चना करते हैं. यहां के मुख्य पुजारी पंडित हरिओम शर्मा ने बताया कि इस भव्य, दिव्य मंदिर में पिछले करीब 30 सालों से अखंड ज्योत लगातार जल रही है. उन्होंने कहा कि चाहे बारिश आए, तूफान आए या तेज हवाएं आएं, यह दिव्य ज्योत लगातार जलती रहती है. उन्होंने कहा कि यहां कई भक्त अपनी परेशानी लेकर आते हैं और विधि-विधान से यहां पूजा करते हैं, उनकी मनोकामना भी मैया पूरी करती हैं. पुजारी ने कहा कि यह मंदिर बेहद चमत्कारी और प्राचीन है.
ककईया ईंटों से बना था मंदिर, वट वृक्ष के नीचे बाबा करते थे तपस्या
मां चामुंडा देवी मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि यहां स्थापित प्रतिमा कई वर्षों प्राचीन है. उन्होंने कहा कि पहले यहां सिर्फ लाहौरी ईंट (ककईया ईंट जो पतली, लाल, पकी हुई होती है) का बना छोटा सा कमरा था, जहां मैया की दिव्य प्रतिमा स्थापित थी. मंदिर के पास एक विशाल वट वृक्ष था. यहां एक बाबा थे जो तपस्या करते थे, धीरे-धीरे बाद में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया. आसपास के लोग यहां पूजा-अर्चना करने आने लगे. लोगों की यहां आकर मुराद पूरी होने लगी और लोगों के बिगड़े काम बनने लगे, जिससे इस मंदिर की मान्यता और अधिक होने लगी.
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राहुल गोयल News18 इंडिया में कार्यरत पत्रकार हैं. टीवी पत्रकारिता, रिपोर्टिंग और एंकरिंग में 13 वर्षों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले युवा पत्रकार के तौर पर इनकी रुचि विज्ञान, टेक्नॉलजी, व्यापार जगत और नई खोजों क…और पढ़ें