अखिलेश का सॉफ्ट हिंदुत्व! चारों शंकराचार्य की मौजूदगी में निकलेगी PDA रथयात्रा

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अखिलेश का सॉफ्ट हिंदुत्व! चारों शंकराचार्य की मौजूदगी में निकलेगी PDA रथयात्रा


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Akhilesh Yadav UP Election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी से सियासी पारा चढ़ा हुआ है. तमाम राजनीतिक पार्टियां वोटरों को लुभाने में अभी से लगी हुईं हैं. राम मंदिर दान चोरी के बाद से समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव ने अपने कोर वोटर से इतर सॉफ्ट हिंदुत्व पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. इसी क्रम में खबर आ रही है कि अखिलेश प्रदेश भर की सभी 403 सीटों पर अपनी PDA यात्रा निकालने जा रहे हैं. इसमें कांग्रेस ने भी उनको समर्थन दिया है.

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अखिलेश यादव का सॉफ्ट हिंदूत्व कार्ड

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल भले ही अभी आधिकारिक तौर पर न बजा हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी है. चुनाव में अब 10 महीने से भी कम का वक्त बचा है, ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता है. सभी पार्टियां अपने-अपने वोटरों को टारगेट कर खास रणनीति बनाने में जुटी हैं. इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ‘रथ यात्रा’ वाले फॉर्मूले पर लौटने वाले हैं. इस बार उनके पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत उनके द्वारा बनाए गए इटावा के केदारेश्व मंदिर से चारों शंकराचार्य की मौजूदगी में शुरु होगी. अखिलेश यादव पीडीए (PDA- पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ-साथ ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का तड़का लगाकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.

समाजवादी पार्टी पूरे प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को मथने के लिए ‘PDA यात्रा’ निकालने जा रही है. सूत्रों की मानें तो सितंबर महीने में इस भव्य रथ यात्रा का आगाज हो सकता है. हालांकि, पार्टी की ओर से अभी आधिकारिक तारीख का ऐलान होना बाकी है. सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस यात्रा की शुरुआत की जगह और उसके स्वरूप को लेकर है. बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव अपनी इस रथ यात्रा की शुरुआत अपने गृह जिले इटावा से कर सकते हैं.

चारों शंकराचार्यों की मौजूदगी
इटावा में अखिलेश यादव ने एक भव्य ‘केदारेश्वर मंदिर’ का निर्माण करवाया है. सूत्रों का कहना है कि इसी मंदिर में चारों शंकराचार्यों की मौजूदगी और उनके आशीर्वाद के साथ अखिलेश यादव इस रथ यात्रा का शंखनाद कर सकते हैं. यानी साफ है कि अखिलेश यादव इस बार खुले तौर पर सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति करेंगे.

विपक्ष का ‘सनातनी’ दांव
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों और हालिया विवादों के बाद से ही पूरा विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, खुद को सबसे बड़ा रामभक्त और असली सनातनी साबित करने की होड़ में लगी है. अखिलेश यादव का केदारेश्वर मंदिर से रथ यात्रा शुरू करना इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. सपा प्रवक्ता अमीक जमाई और फखरुल हसन चांद भी इस रणनीति को धार देते हुए पार्टी के पीडीए विजन और हिंदुत्व प्रेम को जनता तक पहुंचाने में जुटे हैं.

कांग्रेस का मिला पूरा साथ
अखिलेश यादव के इस चुनावी अभियान और रथ यात्रा को सहयोगी दल कांग्रेस का भी पूरा समर्थन मिल रहा है. दरअसल, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का अपना जमीनी संगठन फिलहाल ना के बराबर है. ऐसे में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के मजबूत कंधों के सहारे अपना खोया हुआ जनाधार वापस तलाशने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस प्रवक्ता सचिन रावत ने भी सपा की इस यात्रा का स्वागत करते हुए गठबंधन की एकजुटता का संदेश दिया है.

सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड से यूपी फतह करने की तैयारी में अखिलेश यादव

बीजेपी का पलटवार- ‘जनता माफियाराज नहीं भूली’
सपा की इस रथ यात्रा और सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जोरदार पलटवार किया है. यूपी बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह और अल्पसंख्यक मोर्चा के महामंत्री इसरार अहमद ने सपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अखिलेश यादव चाहे कितने भी मंदिर चले जाएं या रथ यात्राएं निकाल लें, उत्तर प्रदेश की जनता 2017 से पहले वाले ‘माफियावाद’ और गुंडाराज को अभी भूली नहीं है. बीजेपी का दावा है कि सूबे की जनता इन दिखावटी यात्राओं के झांसे में नहीं आएगी.

अंतिम फैसला जनता के हाथ
उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में शह और मात का खेल शुरू हो चुका है. पीटीसी अमित कुमार सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही आमने-सामने आ गए हैं. लेकिन, लोकतंत्र में सबसे चालाक और समझदार ‘जनता’ होती है. यूपी की जनता बड़ी खामोशी से सब देख रही है और वह आखिरी वक्त तक यह एहसास नहीं होने देती कि वह किसके साथ है. अब देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश का यह नया दांव चुनाव में क्या गुल खिलाता है.

इटावा के केदारेश्वर मंदिर की खासियत
उत्तर प्रदेश के इटावा में यमुना तट पर केदारेश्वर महादेव मंदिर बनाया गया है. इसका निर्माण सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कराया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण शैली है. इसे बनाने में लोहे या सीमेंट के बजाय पारंपरिक रूप से गुड़, चना और केले के पेस्ट का इस्तेमाल किया गया है. इसमें नेपाल की पवित्र शालिग्राम शिला और तमिलनाडु के खास पत्थर जड़े गए हैं. इस भव्य मंदिर का मुख्य भवन हुबहू उत्तराखंड के केदारनाथ धाम जैसा दिखता है. वही, पूरा परिसर तंजौर के बृहदेश्वर मंदिर से प्रेरित है. इसे ‘शिव-शक्ति अक्ष रेखा’ पर निर्मित किया गया है. इस मंदिर के गर्भगृह की ऊंचाई केदारनाथ से मात्र एक इंच कम (84 फीट) रखी गई है. यहां के पुजारी तमिलनाडु से आए विशेष पुरोहित हैं. यहां बालस्वरूप भगवान श्रीराम भी विराजमान हैं.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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