नीचे नदी, ऊपर नहर, 2 चौराहे, सड़क-एक्सप्रेसवे, अनोखा पुल है इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना
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Anokha Pul : नदी के ऊपर पुल तो आपने अक्सर देखें होंगे लेकिन क्या आपने नदी के ऊपर नहर देखी है? क्या आपने ऐसी नहर देखी है जो नीचे से सूखी हो, जिसके तलहटी पर लोग घूमते हों. क्या आपने ऐसी नहर देखी है जो पाइप के जैसी हो और नदी के ऊपर बहती हो? यूपी के एक जिले में नदी के ऊपर ऐसा ही अनोखा पुल बना हुआ है जिस पर नहर बहती है. इसी नहर के बगल से एक्सप्रेसवे गुजरता है. इतना ही नहीं, नहर पर दो सड़के बनी हैं. दो चौराहे भी बने हैं.
रेल मार्ग या सड़क मार्ग से यात्रा करते समय कई बार अनोखी हवेली-महल और पुल देखने को मिल जाते हैं. इनकी बनावट सोचने को मजबूर कर देती है. यूपी के एक जिले में बना अनोखा पुल इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना है. पुल के नीचे नदी बहती है जबकि ऊपर नहर है. नहर पाइप लाइन की तरह है. यह अनोखा पुल लखनऊ शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर इंदिरा डैम पर बना हुआ है. इसी के ऊपर से इंदिरा नहर बहती है. इंदिरा नहर को शारदा कैनाल के नाम से भी जाना जाता है.
इंदिरा डैम लखनऊ से सुल्तान रोड पर स्थित है. फैजाबाद हाइवे से पहले बीच में यह डैम बना हुआ है. इस नहर को बनाने की शुरुआत 1972 के आसपास हुई थी. बनने में पूरा 5 साल का वक्त लगा. इसको बनाने की मुख्य वजह यह थी कि घाघरा नदी का पानी एक नहर के जरिये लखनऊ के आसपास के इलाकों में लाना था. नहर किसानों के लिए बनाई जानी थी. इस काम में लखनऊ की गोमती नदी बड़ी चुनौती थी.
बीच में गोमती नदी पड़ रही थी. अगर नहर का पानी गोमती नदी में डाल दिया जाता तो फिर इसको बनाने का मकसद सिद्ध नहीं हो पाता. पूरा पानी गोमती नदी के जरिये बह जाता और किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता.
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नहर पर काम करने वाले इंजीनियर्स के सामने बड़ी चुनौती थी कि इस नहर को गोमती नदी के पार कैसे किया जाए. इसका एक ही उपाय था कि नहर को एक पाइपनुमा डैम के जरिये नदी के पार किया जाए. प्लान के मुताबिक ऐसा ही किया गया. इस तरह से गोमती नदी के ऊपर से मेगा स्ट्रक्चर बनाकर नहर उस पार निकाली गई.
कहा जाता है कि 70 के दशक में लखनऊ-रायबरेली, सुल्तान से लेकर बलिया-वाराणसी-गाजीपुर-मऊ तक किसानों के लिए खेतों में पानी उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती थी. ऐसे में यह शारदा नहर निकाली गई. यह नहर लखीमपुरखीरी के शारदा नगर डैम से अपना आगे का सफर शुरू करती है. सीतापुर जिले के महमूदाबाद में दो हिस्से बंट जाती है. एक ब्रांच बाराबंकी होते हुए अयोध्या की तरफ तो दूसरी शाखा लखनऊ-रायबरेली-अमेठी होते हुए आगे बढ़ती है.
इस नहर के लिए पुल की बुनियाद करीब 100 मीटर खोदी गई थी. 12 पिलर बनाए गए. एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच की दूरी करीब 33 मीटर रखी गई. नदी के ऊपर किसी नहर का बहना किसी अजूबे से कम नहीं है. इस एक्वाडक्ट की कुल लंबाई 382 मीटर है. लगभग एक किलोमीटर के बराबर है. पूरे देश में यह एक्वाडक्ट सबसे लंबा कहा जाता है. यह एक्वाडक्ट 38.5 मीटर गहरा है.
यह अनोखा पुल लखनऊ से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर है. इस नहर के समांनातर दो सड़कें भी बनाई गई हैं. दो चौराहे भी बनते हैं. पर्यटकों को यहां पर मरीन ड्राइव जैसी फीलिंग आती है. इसी नहर के बगल में एक्सप्रेसवे भी बना है. पास में ही ड्रीमवैली वॉटर पार्क भी है.