जहां मन हुआ वहां गुदवा लिया, ऐसे तो चले जाएंगे जहन्नुम, महिला के साथ क्या हुआ?
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Kanpur News: शरीर पर टैटू जितना बड़ा होगा दिखने में उतना ही सुंदर लगता है. मगर, यह कितना खतरनाक हो सकता है, इसका अंदाजा आप कानपुर की महिला की कहानी सुनकर लगा सकते हैं. उसे क्या पता था कि दिल्ली जाना उसके लिए नासूर बन जाएगा. उसने मजे मजे में टैटू बनवा लिया और आज वह एक गंभीर बीमारी से जूझ रही है.
कानपुर की महिला टैटू बनवाने के बाद हुई एचआईवी पॉजिटिव. (सांकेतिक तस्वीर)
कानपुर : खुद को स्टाइलिश दिखाने के लिए जहां मन होता वहां गुदवा लेते हैं. बिना सोचे समझे कि ये कितना खतरनाक हो सकता है. शरीर टैटू से जितना ही सुंदर दिखता है उतना ही खतरनाक इसके साइड इफेक्ट भी हैं. अगर ऐसे ही अपने शरीर के किसी भी अंग पर टैटू बनवाते रहे तो जहन्नुम जा सकते हैं. यह हम नहीं कह रहे बल्कि कानपुर की महिला के साथ जो हुआ उससे तो यही लगता है. उसे दिल्ली में टैटू बनवाने का शौक भारी पड़ गया. महिला एचआईवी पॉजिटिव निकली है.
महिला जेनिटल इंफेक्शन की शिकायत लेकर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज पहुंची थी. जांच के दौरान डॉक्टरों ने एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी टेस्ट कराया, जिसमें महिला एचआईवी संक्रमित पाई गई. जब उसे पता चला तो पैरों तले जमीन खिसक गई. उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि एक टैटू उसकी पूरी जिंदगी खराब कर देगा.
कितना है खतरनाक टैटू?
दरअसल, टैटू जितना बड़ा होगा दिखने में उतना ही सुंदर लगता है लेकिन यह हमारे अंदर की मांसपेशियों को धीरे-धीरे से खराब करता चला जाता है. हम अगर टैटू निकलवाते हैं, तो हमारी त्वचा बहुत खराब हो जाती है और बहुत सारे नुकसान हम लोगों को झेलने पड़ते हैं. कई बार टैटू बनवाने के दौरान त्वचा में चोट लगती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. टैटू बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली स्याही में केमिकल होते हैं, जो त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं. अगर सुई का खास ध्यान नहीं रखा जाता, तब भी आपको बड़ी बीमारी हो सकती है. ऐसा ही कानपुर की महिला के साथ हुआ.
प्राइवेट पार्ट में गंभीर संक्रमण से थी परेशान
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेतांक ने बताया कि करीब एक हफ्ता पहले यह पीड़ित महिला इलाज के लिए उनके पास आई थी. महिला ने कुछ समय पहले दिल्ली से टैटू बनवाया था, जिसके बाद उसे प्राइवेट पार्ट में गंभीर संक्रमण (जेनिटल इंफेक्शन) की शिकायत होने लगी. इस इंफेक्शन की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने महिला का एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी टेस्ट करवाया. जब टेस्ट की रिपोर्ट आई तो सब हैरान रह गए. महिला एचआईवी पॉजिटिव निकली. संक्रमण की वजह टैटू बनाते समय इस्तेमाल की गई दूषित और असंक्रमित सुई (नीडल) थी.
कहां हो रहा इलाज?
डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण की वजह टैटू बनाते समय इस्तेमाल की गई दूषित सुई हो सकती है. पीड़ित महिला का एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) ट्रीटमेंट सरकारी स्तर पर शुरू करवा दिया गया है, जो पूरी तरह से निशुल्क है. हालांकि, इस बीमारी का कोई स्थाई इलाज नहीं है और इसके लिए जीवन भर बेहद सतर्कता के साथ दवाएं लेनी पड़ती हैं. डॉक्टरों ने टैटू बनवाने वालों से पूरी सावधानी बरतने की अपील की है.
टैटू बनवाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- हमेशा प्रमाणित और साफ-सुथरे टैटू स्टूडियो का चयन करें.
- टैटू आर्टिस्ट से अपने सामने सील पैक नई सुई खुलवाएं.
- इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की साफ-सफाई जरूर जांचें.
- टैटू में इस्तेमाल होने वाली स्याही की क्वालिटी को लेकर भी सतर्क रहें.
About the Author

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें