ट्रेन के AC डिब्बे में बेटिकट पकड़े गए प्रेमानंद महाराज, TTE ने कर दी गालियों की बौछार

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ट्रेन के AC डिब्बे में बेटिकट पकड़े गए प्रेमानंद महाराज, TTE ने कर दी गालियों की बौछार


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Premanand Maharaj Share Miracle Story | Premanand Maharaj : प्रेमानंद जी महाराज सोशल मीडिया पर आजकल छाए रहते हैं. रील्स स्क्रॉल करने पर खुद-ब-खुद उनका वीडियो सामने आ जाता है. अब उनसे मिलने पहुंचे भक्त ने पूछा कि आप भगवान को इतना क्यों मानते हैं. इस पर उन्होंने बड़े ही सहज जवाब दिया कि सुनकर हर किसी का चेहरा चमक गया. उन्होंने बताया कि कैसे एक सेकंड में भगवान उनकी बात सुन लेते हैं.

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प्रेमानंद महाराज जी का वायरल वीडियो.

Premanand Maharaj Viral Video: प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) एक ऐसा नाम है, जिसे सुनकर चाहे हिंदू हो या मुस्लिम… हर किसी के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है. संत किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. देश से लेकर विदेश तक के लोग वृंदावन के फेमस संत से मिलने पहुंचते हैं. वहीं, सोशल मीडिया पर आजकल छाए रहते हैं. वे अपने सत्संग के माध्यम से लोगों को सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन का ज्ञान देते हैं. अक्सर, प्रेमानंद महाराज से सत्संग के बाद श्रद्धालु अपनी तमाम तरह की समस्याओं को लेकर सवाल पूछते हैं, जिसका संत बहुत सहज तरीके से उत्तर देते हैं. इसी बीच उनसे एक भक्त ने उनके भगवान को लेकर सवाल किया तो उन्होंने अपना एक पुराना किस्सा शेयर किया. बताया कि एक बार वो एसी के डिब्बे में बैठ गए. तभी टीटीई आया और टिकट मांगने लगा. जब वह नहीं दे पाए तो वहां मौजूद लोग गालियां देने लगे. मगर, फिर उन्होंने भगवान को याद किया और एक सेंकड में सब सही हो गया.

कैसे बचे दलदल से?

सेकंड में बात सुनी गई है. मिनट नहीं सेकंड में बात सुनी गई है. बचपन से भगवान में लगे हुए हैं. भगवान के सिवा मेरा कोई नहीं है. हम मिनट की बात नहीं कहते हैं. सेकंड में बात सुनी गई है. भारी से भारी समस्या भगवान से कहते ही चुटकियों में निकल गई. एक बार हम जा रहे थे. भगवान में खोए हुए थे. सामने सड़क पर पपड़ी डली हुई थी. हम मस्त छड़ी घुमाते हुए जा रहे थे. चिंतन करते हुए, लेकिन तभी एक आवाज आई कि ऐ सामने दलदल है. हमने तुरंत आसपास देखा कोई था ही नहीं. हमने फिर सड़क पर छड़ी मारी तो पूरी छड़ी नीचे तक चली गई. ऊपर पपड़ी और नीचे दलदल था. अब बताओ अगर हम वहां फंस जाते तो क्या होता.

ट्रेन में जब गालियों की होने लगी बौछार

अब दूसरा उदाहरण यह है कि हम ट्रेन से महोबा से बनारस जा रहे थे. हमारे पास एक छोटी सी टिकट थी. ज्यादा पढ़े लिखे थे नहीं. अंग्रेजी आती नहीं थी. टिकट हमें जनरल का दे दिया और बैठा एसी के डिब्बे में दिया. हमें लगा हमारे पास तो टिकट है ही. हम तो आराम से बैठे हुए थे कि हमें क्या टेंशन. जब चार-छह स्टेशन निकल गए तब एक पूरा बैच आया. उनमें से एक टीटीई ने पूछा कि टिकट कहां हैं. हमने बड़े गर्व से जो हमारे पास टिकट था वो दिखा दिया.

इस पर टीटीई गुस्सा हो गया. उन्होंने कहा कि ये क्या है. पहले तो आप एसी कोच में बैठे हैं और टिकट आपने जनरल की ले रखी है. दूसरा ये टिकट सिर्फ 3 स्टेशन की है. आप कहां जा रहे हो? इस पर मैंने कहा कि हम तो बनारस जा रहे हैं. तो उन्होंने कहा कि लेकिन आप पर तो टिकट ही नहीं है. वहां दो-चार लोग जो थे वो गालियां बकने लगे. हर किसी की श्रद्धा संतों पर नहीं होती है ना.

उन्होंने कहा कि आगे टीटीई बोले कि खड़े हो. हम खड़े हो गए और भगवान का चिंतन करने लगे. हमने प्रभु से कहा कि भगवान हमें तो कुछ पता नहीं है. न हमारे पास पैसा है. तुरंत ऊपर वाली सीट से एक आदमी उतरा और अंग्रेजी में उनसे बात की. टीटीई ने एक बड़ा सा कागज हमें दिया और उस शख्स ने उन्हें पैसा दिया और हमसे कहा कि महाराज जी आप बैठ जाइए. हम आराम से उतर गए और वाराणसी उतर गए. वो कौन था. हमारा किससे परिचय था. एक सेकंड में भगवान ने सारी समस्या दूर कर दी. ये कोई एक बार नहीं हुआ है बल्कि हजारों बार हमने देखा है कि भगवान हमारी एक एक बात सुनते हैं. हमारे पास हैं, हमारे साथ हैं.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें



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