वकील बनना चाहते थे संदीप गुप्ता बन गए जिला उद्यान अधिकारी

0
वकील बनना चाहते थे संदीप गुप्ता बन गए जिला उद्यान अधिकारी


Agency:Local18

Last Updated:

संदीप कुमार गुप्ता ने अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए वकील बनने की बजाय उद्यान अधिकारी बनने का फैसला किया. 1997 में वाराणसी में वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक बने और अब मऊ में सेवा कर रहे हैं.

X

sandeep gupta, success story

हाइलाइट्स

  • संदीप गुप्ता ने पिता के सपने के लिए वकील बनने का विचार छोड़ा.
  • 1997 में वाराणसी में वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक बने.
  • अब मऊ जिले में उद्यान अधिकारी के रूप में सेवा कर रहे हैं.

मऊ: उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता अपने माता-पिता के सपने को पूरा करने की मिसाल हैं . 1 मार्च 1972 को जौनपुर जिले के महिमापुर जलालपुर गांव में जन्मे संदीप वकील बनना चाहते थे, लेकिन अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने उद्यान अधिकारी बनने का फैसला किया.

1996 में स्टेशन मास्टर की नौकरी मिली
संदीप ने बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से शुरू की. 1986 में उन्होंने बयालसी इंटर कॉलेज से हाई स्कूल और 1988 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की. 1991 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी. लगभग 7 साल की कड़ी मेहनत के बाद 1996 में उन्हें मुंबई में स्टेशन मास्टर की नौकरी मिल गई.

संदीप के पिता नहीं थे खुश
1997 में उनका चयन आयकर विभाग में हो गया, लेकिन मुंबई में नौकरी करने की वजह से उनके पिता खुश नहीं थे. संदीप अपने पिता की इच्छा के खिलाफ नहीं जाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और वापस गांव आ गए.

संदीप ने  पिता का किया सपना पूरा
गांव आकर उन्होंने फिर से परीक्षा दी और 1997 में वाराणसी में वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक के पद पर नियुक्त हुए. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज मऊ जिले के उद्यान अधिकारी के रूप में लोगों की सेवा कर रहे हैं. संदीप बताते हैं कि वह अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए ही आज इस पद पर हैं.

homeuttar-pradesh

वकील बनना चाहते थे संदीप गुप्ता बन गए जिला उद्यान के अधिकारी



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हो सकता है आप चूक गए हों