बच्चों को इस दरगाह पर लाने से तुरंत याद हो जाता है कुरान! रमजान के महीने में उमड़ रही भीड़

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बच्चों को इस दरगाह पर लाने से तुरंत याद हो जाता है कुरान! रमजान के महीने में उमड़ रही भीड़


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रामपुर के बाजोड़ी टोला में हाफिज शाह जमाल उल्लाह रहमतुल्लाह अलैह की 250 साल पुरानी दरगाह पर रमजान में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है. यहां आने से कुरान याद करने में आसानी होती है.

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रमजान के मुबारक महीने में रामपुर की मशहूर दरगाह पर उमड़ रही भीड़, बच्चों को कुरा

हाइलाइट्स

  • रमजान में रामपुर की दरगाह पर भीड़ उमड़ रही है.
  • बच्चों को कुरान याद कराने की मान्यता है.
  • दरगाह 250 साल पुरानी है और आस्था का केंद्र है.

रामपुर: रमजान का पाक महीना चल रहा है, और इस मौके पर रामपुर के बाजोड़ी टोला में स्थित हाफिज शाह जमाल उल्लाह रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है. रोज़ेदार और अकीदतमंद दूर-दूर से यहां हाजिरी लगाने और मुरादें पूरी करने के लिए पहुंच रहे हैं. खासतौर पर जुमेरात (गुरुवार) के दिन यहां की रौनक और भी ज्यादा देखने को मिलती है.

इस दरगाह से जुड़ी एक खास मान्यता लोगों की आस्था को और मजबूत बनाती है. कहा जाता है कि जो भी बच्चा कुरान याद करने में कठिनाई महसूस करता है, अगर वह इस मजार पर हाजिरी देता है, तो उसे कुरान याद करने में आसानी होती है. यह मान्यता न सिर्फ रामपुर बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों तक फैली हुई है, जिसके चलते यहां दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं.

ढाई सौ साल पुरानी है दरगाह
इतिहासकार फरहत अली खान बताते हैं कि यह मजार लगभग 250 साल पुरानी है और इसे हाफिज शाह जमाल उल्लाह रहमतुल्लाह अलैह का आस्ताना माना जाता है. हाफिज साहब अल्लाह के बड़े वली थे और कुरान शरीफ पढ़ने में उनका कोई मुकाबला नहीं था. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दीन की खिदमत में गुजार दी.

दरगाह पर सिर झुकाने से मिलती है राहत
लोगों का मानना है कि दरगाह पर आकर सिर झुकाने से परेशानियां दूर होती हैं और बरकत हासिल होती है. रमजान के पाक महीने में यह आस्था और भी गहरी हो जाती है. पहले इस मजार के चारों ओर घना जंगल हुआ करता था, लेकिन अब यह इलाका पूरी तरह आबाद हो चुका है. हालांकि, दरगाह की पवित्रता और आस्था का माहौल आज भी पहले की तरह बरकरार है.

रमजान में दिन-रात उमड़ रही भीड़
रमजान के इस मुबारक महीने में अकीदतमंदों की भीड़ दिन-रात यहां देखी जा सकती है. लोग नमाज अदा करने के बाद दरगाह पर हाजिरी देते हैं और अपनी मुरादें लेकर लौटते हैं. यह दरगाह आज भी हजारों लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है और बच्चों के लिए खासतौर पर उम्मीद की जगह मानी जाती है, जहां से वे कुरान याद करने की बरकत हासिल कर सकते हैं.

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बच्चों को इस दरगाह पर लाने से तुरंत याद हो जाता है कुरान!

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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