Allahabad University के छात्रावास में छात्र संसद की अनोखी पहल
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Allahabad University: इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केपीयूसी छात्रावास में छात्रों ने संसद की तर्ज पर छात्र संसद शुरू की है. रोहित ने इस पहल की शुरुआत की, जिसमें छात्रों को संसदीय प्रक्रियाओं का अनुभव मिलता है.
Allahabad University
हाइलाइट्स
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संसद की शुरुआत हुई.
- छात्र संसद में मंत्री और राज्य मंत्री बनाए गए.
- छात्र संसद में संसदीय प्रक्रियाओं का अनुभव मिलता है.
Allahabad University: इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जिसे पूर्व का ऑक्सफोर्ड कहा जाता है, में छात्र संघ चुनाव अब नहीं होते, लेकिन यहां के पॉक छात्रावास के छात्रों ने एक नई पहल शुरू की है. कहा जाता है कि छात्र राजनीति मुख्य राजनीति की नर्सरी होती है, जहां नए छात्र भारतीय राजनीति के लिए तैयार होते हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का देश की राजनीति में बड़ा योगदान रहा है. इस विश्वविद्यालय से देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी निकल चुके हैं. इस छात्रावास में कुछ अनोखा काम किया जा रहा है.
चलती है संसद
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केपीयूसी छात्रावास में रहने वाले रोहित राजनीति विज्ञान में रिसर्च कर रहे हैं. उन्होंने इस छात्रावास में एक सांसद की तरह चलने वाले सदन की शुरुआत की है. रोहित बताते हैं कि सीखने से ही जानकारी बढ़ती है. हमारे देश की संसद में मंत्री, सदस्य, और लोकसभा स्पीकर अपनी-अपनी चेयर पर बैठकर उपस्थिति दर्ज करते हैं. यहां भी छात्रों को संसद की विभिन्न व्यवस्थाओं जैसे शून्य काल से लेकर अवकाश तक को सीखने का मौका मिलेगा. इस व्यवस्था में छात्रों ने प्रमुख मंत्री, सदन अध्यक्ष, 7 केंद्रीय मंत्री और 7 राज्य मंत्री भी बनाए हैं. रोहित बताते हैं कि यहां भी संसद की तरह नियम चलता है कि कुल सदस्यों के 15% सदस्य मंत्री पद धारण कर सकते हैं.
ऐसे होता है चुनाव
इस छात्रावास के छात्रों के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होते हैं. इसमें स्नातक के प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष में टॉप करने वाले छात्रों को वरीयता दी जाती है. सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र को मंत्री पद दिया जाता है ताकि अन्य छात्र भी पढ़ाई में मन लगाएं और अधिकतम अंक हासिल करने की कोशिश करें. रोहित बताते हैं कि ब्लू कलर 18 के माध्यम से 91 कमरे में रहने वाले छात्रों द्वारा चुनी गई इस संसद को सुचारू रूप से चलाने में सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर हौसला सिंह का महत्वपूर्ण योगदान होता है. साथ ही, छात्रों की राय से केपीयूसी हॉस्टल के सभी कमरों के नाम नदियों के नाम पर रखे जा रहे हैं.
सुपरिंटेंडेंट का खूब सहयोग
हॉस्टल के अधीक्षक डॉक्टर हौसला सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि जैसे ही छात्रों का यह विचार हमारे सामने आया, हमने तुरंत इसका स्वागत किया और पुराने बड़े हॉल को छात्र संसद में बदल दिया. स्थिति थोड़ी खराब थी, इसलिए इसे ठीक करवा कर अतिरिक्त चेयर लगाई गईं ताकि छात्र संसद सुचारू रूप से चल सके. यह छात्रों का रचनात्मक कार्य है, जिससे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलेगा, उनकी झिझक दूर होगी और वे भारतीय संसद के संचालन की प्रक्रिया को समझ सकेंगे. डॉक्टर सिंह बताते हैं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विभिन्न विषयों के प्रोफेसर आते हैं और इस छात्र संसद को चलते हुए देखते हैं. अगर कोई कमी होती है, तो वे सलाह भी देते हैं.