अरहर की दाल हुई सस्ती, अन्य दालों के भी दाम घटे, कानपुर में चल रहा है ये रेट
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Arhar dal price: कानपुर में अरहर की दाल के दाम घट गए हैं. दाल के दाम घटने से लोगों को राहत मिली है.
दाल
कानपुर: आमजन की थाली में स्वाद और पोषण का अहम हिस्सा मानी जाने वाली अरहर की दाल के दामों में हाल ही में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. बीते साल जहां इसके दाम आसमान छू रहे थे, वहीं इस साल यह दाल आमजन की पहुंच में लौटती दिख रही है. पिछले साल अरहर की दाल के दाम 180 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए थे. इससे लोगों को इसे खरीदने से पहले कई बार सोचना पड़ता था. अब खरीफ की फसल में हुई अच्छी पैदावार और बाज़ार में बढ़ी सप्लाई के चलते इसके दाम गिरकर थोक में 100 रुपये और फुटकर में 105 से 110 रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं.
कम हो सकते है दाम
दाल कारोबारियों का दावा है कि यदि मौसम और सप्लाई की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आने वाले दिनों में अरहर दाल के दाम और गिरकर 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं. इस गिरावट से आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. खाने की थाली में रोजाना शामिल होने वाली इस दाल को लोग फिर से नियमित रूप से खरीदना शुरू कर सकते हैं.
चार-पांच साल बाद फिर सामान्य हुए दाम
भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने बताया कि चार-पांच साल पहले अरहर की दाल 100 रुपये प्रति किलोग्राम में बिक रही थी. इसके बाद लगातार दाम बढ़ते गए और बीते साल लोगों ने इसकी ऊंची कीमतों के कारण इसे खरीदना तक बंद कर दिया. उन्होंने बताया कि पिछले साल तो हालात यह हो गए थे कि लोगों ने अरहर की जगह दूसरी दालों या मटर का इस्तेमाल शुरू कर दिया था.
ज्ञानेश मिश्रा के मुताबिक, इस बार अरहर के साथ-साथ अन्य दालों जैसे उरद, मूंग, मसूर और चने की दालों के दामों में भी गिरावट दर्ज की गई है. इसके साथ ही मटर जैसी सस्ती दालों की कीमतों में भी नरमी आई है. इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और लोगों को विकल्प मिलना आसान हुआ है.
खरीदारों की वापसी से बाजार में हलचल
थोक व्यापारी और फुटकर विक्रेता दोनों ही यह मान रहे हैं कि दामों में गिरावट का सीधा असर खरीदारी पर पड़ा है. अब ग्राहक वापस बाजारों में लौट रहे हैं और दालों की मांग बढ़ रही है. खासतौर से अरहर दाल, जो प्रोटीन का अच्छा स्रोत मानी जाती है एक बार फिर से आम थाली का हिस्सा बनती नजर आ रही है.
सरकार से नीति निर्धारण की मांग
व्यापारियों का कहना है कि सरकार को दालों की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक नीतियां बनानी होंगी, ताकि उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बना रहे. इससे न केवल किसानों को सही मूल्य मिलेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी राहत मिलती रहेगी.