इस गेट पर लगी जंजीरें चूमकर आगे बढ़ती है बारात, जानें सदियों पुराने रिवाज का सीक्रेट
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Bahraich Sayyed Salar Masood Ghazi Dargah : बहराइच के सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह का जंजीरी गेट काफी पुरानी और जीवंत है. इसका निर्माण दिल्ली सल्तनत के शासक फिरोजशाह तुगलक ने कराया था.
बहराइच दरगाह शरीफ जंजीरी गेट!
हाइलाइट्स
- मसूद गाजी की दरगाह का जंजीरी गेट काफी पुराना है.
- फिरोज शाह तुगलक ने इसका निर्माण कराया था.
- लोग जंजीर चूमकर दरगाह में दाखिल होते हैं.
बहराइच. नेपाल से सटे यूपी के बहराइच में कई जगहों का इतिहास काफी जीवंत और पुराना है. बहराइच शहर के सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह का जंजीरी गेट इन्हीं जगहों में एक है. इसका निर्माण तुगलक वंश के शासक फिरोजशाह तुगलक ने कराया था. यहां सैयद सालार मसूद गाजी की मजार में दाखिल होने से पहले जंजीरी गेट पड़ता है. लोग पहले इस जंजीर को चूमकर दाखिल होते हैं. कहा जाता है कि गाजी एक ओहदेदार थे. इस वजह से इन जंजीरों को लगाया गया, ताकि उनके दरबार में लोग इस जंजीर को चूमकर, झुककर अदब के साथ जाएं.
धीरे-धीरे बन गई प्रथा
बहराइच के सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह हर साल लगने वाले जेठ माह के मेले के लिए फेमस है. इस दरगाह में दाखिल होने से पहले एक बड़ा सा गेट मिलता है. गेट पर ऊपर के हिस्से में दो बड़ी-बड़ी ढोल रखी हुई हैं. ऊपर के हिस्से में सैयद सालार मसूद गाजी लिखा हुआ है. इसी गेट के बीचों-बीच में नीचे के हिस्से में बहुत सारी मोटी-मोटी जंजीरें लगी हैं. कभी अंग्रेज भी अपने घोड़े से इस दरगाह पर आया करते थे. जंजीर लग जाने से लोग झुक कर आने लगे. धीरे-धीरे लोग इस जंजीर को चूमकर दरगार में दाखिल होने लगे. जंजीरी गेट पर एक बड़ा सा भगोना भी रखा मिलेगा, जिसमें लोग पैसे और चावल आदि डालकर अपनी मुरादें मांगते हैं.
लेते हैं इस गेट की सलामी
सैयद सलाद मसूद गाजी को मानने वाले लोग नया वाहन लेने के बाद सबसे पहले जंजीरी गेट पर आकर सलामी देते हैं. गाड़ी के अंदर एक हरे रंग की चुनरी बांधते हैं. मुस्लिम धर्म में शादी होने के समय दूल्हा बारात ले जाने से पहले जंजीरी गेट को चूम कर आगे बढ़ता है.