Agra News : आगरा के वॉटरवर्क्स चौराहे पर इतिहास का दर्दनाक मंजर, बदहाली की कगार पर ऐतिहासिक मकबरा
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Historic Monuments : मुगलों की राजधानी कहलाने वाला आगरा अपनी शानदार इमारतों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विश्व प्रसिद्ध है. ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसी धरोहरों के बीच अब एक ऐसा मुगलकालीन मकबरा बदहाली के आंसू बहा रहा है,
आगरा. जाफर खान का मकबरा आगरा के वॉटरवर्क्स चौराहे पर स्थित है, जहां से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं. इसके बगल में मौजूद प्राचीन लाल मस्जिद भी ऐतिहासिक महत्व रखती है. दोनों ही इमारतें भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के अधीन संरक्षित धरोहरों की सूची में शामिल हैं. इसके बावजूद इनकी हालत देखकर ऐसा लगता है कि ये इमारतें किसी भी समय जमींदोज हो सकती हैं. चारों ओर फैला कूड़ा, टूटी दीवारें और बदबूदार माहौल इस धरोहर की ऐतिहासिक गरिमा को पूरी तरह से खत्म कर चुके हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम ढलते ही यह मकबरा शराबियों का अड्डा बन जाता है. आसपास रहने वाले लोग कैमरे पर बोलने से बचते हैं, लेकिन उनका कहना है कि रोज़ रात को यहां शराब और नशे की महफिलें सजती हैं. मकबरे के आसपास और अंदर पड़ी शराब की बोतलें और बीयर के डिब्बे इसकी पुष्टि करते हैं. प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह ऐतिहासिक स्थल अब असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गया है. लोगों ने बताया कि रात के समय इस इलाके से गुजरना भी असुरक्षित महसूस होता है.
जर्जर हो चुकी है मकबरे की संरचना
लोकल 18 की टीम जब स्थल पर पहुँची, तो पाया कि मकबरे की दीवारों से चूना निकल चुका है और ईंटें साफ दिखाई दे रही हैं. कई हिस्सों की दीवारें गिर चुकी हैं, जबकि अंदर बनी कब्रों में गंदगी और सड़े हुए कचरे का ढेर जमा है. भीतर की दुर्गंध इतनी तेज़ थी कि रिपोर्टिंग टीम को अंदर प्रवेश करना मुश्किल हो गया. यही नहीं, चारों ओर जमा पानी और सड़ता कचरा संक्रमण का खतरा भी पैदा कर रहा है. इतिहासकारों का कहना है कि जाफर खान मुगल बादशाह के मुख्य दरबारी थे और यह मकबरा 17वीं सदी की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण था. अब यह इमारत अपनी पहचान खोती जा रही है.
पुरातत्व विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा मकबरे के बाहर एक बोर्ड लगाया गया है, जिस पर साफ लिखा है कि यह स्थल संरक्षित है. लेकिन हकीकत में इसका कोई रखरखाव नहीं किया जा रहा. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग के अधिकारी वर्षों से यहां झांकने तक नहीं आए. इस मकबरे की स्थिति देखकर लगता है कि संरक्षण केवल कागजों पर ही हो रहा है. इतिहासकारों का यह भी कहना है कि यदि जल्द मरम्मत और सफाई की पहल नहीं की गई, तो यह मकबरा अगले कुछ वर्षों में पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है. इसके साथ ही जाफर खान का नाम भी इतिहास के पन्नों में सदा के लिए दफन हो जाएगा.
शहर की छवि पर पड़ रहा असर
आगरा एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है, जहां हर साल लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं. जब कोई विदेशी इस तरह की उपेक्षित धरोहर देखता है, तो भारत की सांस्कृतिक छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इतिहास और पर्यटन से जुड़े जानकारों ने मांग की है कि सरकार और पुरातत्व विभाग को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि इस धरोहर को बचाया जा सके.